झारखंड में 102 ब्लैक स्पॉट, हादसे रोकने को बनेगी नयी योजना

झारखंड की सड़कों पर लगातार हो रहे हादसों को रोकने के लिए राज्य सरकार 102 ब्लैक स्पॉट पर नए सिरे से काम कर रही है. इन जगहों पर दुर्घटनाएं रोकने के साथ-साथ घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिलेगी.

रांची: झारखंड की सड़कों पर हादसों का सिलसिला रोकने के लिए राज्य सरकार अब दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानी ब्लैक स्पॉट पर नए सिरे से काम करने की तैयारी में है. राज्यभर में 102 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां लगातार गंभीर सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं. इन स्थानों पर हादसे रोकने के साथ-साथ दुर्घटना के बाद घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी मजबूत की जायेगी.

इस संबंध में नोडल ट्रॉमा केयर सह उप निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ प्रमोद कुमार सिन्हा ने सभी जिलों के सिविल सर्जन को पत्र भेजकर आवश्यक जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है. जिला परिवहन पदाधिकारी और ट्रॉमा केयर से संबंधित डेटा को गूगल शीट पर तैयार किया जायेगा, ताकि प्रत्येक ब्लैक स्पॉट की स्थिति और वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का आकलन किया जा सके.

ब्लैक स्पॉट पर ट्रॉमा सेंटर और एंबुलेंस की व्यवस्था

सड़क सुरक्षा समिति के समन्वय से सभी स्वीकृत ट्रॉमा सेंटरों में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने की योजना है. यहां जनरल सर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन समेत पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की जायेगी.

जिन जिलों में स्वीकृत ट्रॉमा सेंटर अभी फंक्शनल नहीं हैं, वहां पहले से संचालित आपातकालीन क्षेत्र में एक कमरे को ट्रॉमा सेंटर के रूप में चिन्हित करने की तैयारी है. इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचने के बाद बिना देरी के प्राथमिक और जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है.

मुख्य सचिव की बैठक के बाद तेज हुई तैयारी

सड़क सुरक्षा को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानी ब्लैक स्पॉट की सूची मांगी गयी थी. इन स्थानों की जानकारी के आधार पर एंबुलेंस सेवा, ट्रॉमा सेंटर और सड़क सुरक्षा से जुड़े संकेतकों की व्यवस्था करने की योजना बनाई जा रही है.

सरकार का जोर दुर्घटना के बाद इलाज की व्यवस्था के साथ-साथ उन स्थानों पर सड़क सुरक्षा के उपाय लागू करने पर भी है, जहां बार-बार हादसे हो रहे हैं.

500 मीटर के दायरे में पांच गंभीर हादसे तो ब्लैक स्पॉट

किसी सड़क के 500 मीटर के दायरे में पिछले तीन वर्षों के दौरान पांच या उससे अधिक गंभीर दुर्घटनाएं हुई हों या 10 से ज्यादा लोगों की मौत हुई हो, तो उस स्थान को ब्लैक स्पॉट की श्रेणी में रखा जाता है.

झारखंड में ऐसे 102 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किये गये हैं. इनमें दो दर्जन से ज्यादा ब्लैक स्पॉट अकेले रांची जिले में हैं. इन स्थानों पर दुर्घटनाओं को कम करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाने, स्पीड ब्रेकर बनाने और जरूरत के अनुसार सड़क चौड़ीकरण जैसे उपाय किये जाने हैं.

घायलों को तत्काल इलाज दिलाने पर भी जोर

सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके, इसके लिए लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है. जरूरत के अनुसार चिकित्सकों के साथ ओटी असिस्टेंट, जीएनएम, एएनएम और ड्रेसर की तैनाती की जायेगी.

नई व्यवस्था के तहत ब्लैक स्पॉट से जुड़े सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के डेटा को एक साथ तैयार किया जायेगा, ताकि दुर्घटना होने की स्थिति में एम्बुलेंस से लेकर अस्पताल में इलाज तक की पूरी व्यवस्था को तेजी से सक्रिय किया जा सके.

ब्लैक स्पॉट पर क्या होंगे प्रमुख उपाय?

  • चेतावनी और दुर्घटना संभावित क्षेत्र के बोर्ड लगाये जायेंगे.
  • जरूरत के अनुसार स्पीड ब्रेकर बनाये जायेंगे.
  • सड़क की स्थिति के आधार पर चौड़ीकरण का काम किया जायेगा.
  • नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र और ट्रॉमा सेंटर को चिह्नित किया जायेगा.
  • लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी होगी.
  • ट्रॉमा सेंटरों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की जायेगी.


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By Bipin kumar singh

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