देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार के बीच अनलॉक 1 के तहत सभी किस्म की गतिविधियां खोल दी गई हैं. पाबंदियों में तरह से छूट और कुछ अन्य मामले के लेकर एक दो साल के बच्चे ने केजरीवाल सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इस याचिका को दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टीस डीएन पटेल औऱ जस्टीस प्रतिक जैन की बेंच ने स्वीकार कर लिया है और आज यानी मंगलवार को केस सुनवाई के लिये लिस्ट किया गया है.
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से 2 जून के ऑर्डर की वो कॉपी मांगी है जिसमें बिना लक्षण वाले लोगों की टेस्टिंग से जुड़ी बात कही गई थी. इस याचिका में बच्चे ने दिल्ली सरकार द्वारा अनलॉक 1.0 के दौरान पाबंदियों में ढील देने से उत्पन्न होने वाले खतरे का जिक्र किया है. साथ ही उसने कहा है कि कोरोना के बिना लक्षण वाले मरीजों की जांच नहीं करने के कारण उसे और अन्य बच्चों के समक्ष खतरा पैदा हो गया है.
नेशनल हेराल्ड की खबर के मुताबिक, दो साल के बच्चे ने अपने पिता के जरिए दायर याचिका में कहा है कि बिना लक्षण वाले मरीजों की जांच बंद करने और अस्पतालों में बेड तथा वेंटिलेटर की कमी के कारण स्थिति बिगड़ गयी है. याचिकाकर्ता के वकीलों का कहना है कि बिना लक्षण वाले लोगों की टेस्टिंग पर रोक लगाना आईसीएमआर की गाइडलाइंस के खिलाफ है. याचिका में दावा किया गया है कि सरकार का इस तरह का आदेश दिल्ली में कोरोना मरीजों की संख्या कम दिखाने के मकसद से किया गया है.
बच्चे ने कहा कि वह एक संयुक्त परिवार में रहता है जिसके सदस्य काम पर जाते हैं. वे दिल्ली सरकार द्वारा सोमवार से प्रभावी अनलॉक-1 के कारण नियमित दफ्तर जाएंगे जिससे उसे और अन्य बच्चों को तथा दिल्ली के निवासियों को कोरोना वायरस से संक्रमित होने का काफी खतरा है. बता दें कि दिल्ली में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 29943 पहुंच गया है. हालांकि शहर में किसी एक दिन में सर्वाधिक मामले 3 जून को सामने आये थे और यह संख्या 1513 थी. दिल्ली सरकार के मुताबिक पिछले 24 घंटे 17 मौत हुई हैं. इसके चलते मरने वालों का आंकड़ा 874 पर पहुंचा गया है. जबकि 358 मरीज ठीक होकर अपने घर लौट गए हैं.
भूकंप: हाईकोर्ट ने ‘आप’ सरकार और नगर निगमों से मांगा प्लान
दिल्ली और आसपास के हिस्सों में बीते दो महीने से लगातार महसूस किए जा रहे भूकंप के झटकों से आम इंसान के साथ दिल्ली हाईकोर्ट भी चिंतित है. दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली सरकार और सभी नगर निगमों को निर्देश दिया है कि भूकंप से निपटने के लिए अपनी तैयारियों की योजना के बारे में तत्काल आधार पर हलफनामा दायर करें और यह बताएं कि इसे कैसे लागू किया जाए.
Posted By: Utpal kant
