Bihar Flash Flood : पटना में गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच दियारा इलाकों के कई परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है. बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए जिला प्रशासन की ओर से सामुदायिक किचन और मेडिकल कैंप की व्यवस्था की गई है. वहीं, कई परिवार अब भी अपने घरों की छतों पर रात गुजार रहे हैं और दिन में नाव के सहारे राहत शिविर या सामुदायिक किचन तक पहुंच रहे हैं.
हर दिन 1200 लोगों के लिए तैयार हो रहा खाना
बाढ़ पीड़ितों के लिए चलाए जा रहे सामुदायिक किचन में रोजाना करीब 600 से 700 लोगों के लिए एक समय का भोजन तैयार किया जा रहा है. दो समय का हिसाब लगाएं तो करीब 1200 लोगों के लिए प्रतिदिन खाना बनाया जा रहा है. भोजन में दाल, चावल और आलू की सब्जी शामिल है.
सामुदायिक किचन में सुबह और दोपहर के अलावा निर्धारित समय पर बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. यहां आने वाले लोगों से खाने की व्यवस्था और दूसरी जरूरतों के बारे में भी जानकारी ली जा रही है.
घर डूबे, छतों पर रात गुजारने की मजबूरी
बाढ़ प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता रहने की है. कई लोगों ने बताया कि उनके घरों में पानी भर चुका है और परिवार के सदस्य छतों पर रात गुजार रहे हैं. कुछ लोग नाव के सहारे आते-जाते हैं, जबकि परिवार का कम से कम एक सदस्य घर की निगरानी के लिए वहीं रुक रहा है.
कई परिवारों ने बताया कि उनके इलाके में हर साल बाढ़ का पानी पहुंचता है. कुछ लोगों के घर दोबारा पानी में डूब गए हैं. उनका कहना है कि घर और सामान के नुकसान के साथ रोजी-रोटी भी प्रभावित हुई है.
सड़क किनारे भी रात गुजार रहे बाढ़ पीड़ित
दियारा इलाके से विस्थापित कई परिवार पटना के गंगा पाथवे के आसपास अस्थायी तौर पर रह रहे हैं. कुछ लोगों के पास रात में सोने के लिए पक्की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में वे सड़क किनारे गमछा या चादर बिछाकर रात गुजारने को मजबूर हैं.
बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन की ओर से भोजन मिल रहा है, लेकिन रहने और सोने की पर्याप्त व्यवस्था की जरूरत है. कुछ परिवारों ने पिछले वर्षों में खाट और पंखे जैसी सुविधाएं मिलने की बात भी कही और इस बार भी ऐसी व्यवस्था की मांग की.
आम लोगों के साथ जानवरों के लिए भी मेडिकल कैंप
बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की ओर से दो अलग-अलग मेडिकल कैंप चलाए जा रहे हैं. एक कैंप आम लोगों के इलाज के लिए है, जबकि दूसरा जानवरों के लिए बनाया गया है.
आम लोगों के मेडिकल कैंप में बाढ़ पीड़ितों की जांच की जा रही है और जरूरत के अनुसार दवाएं दी जा रही हैं. मरीजों का रिकॉर्ड भी रखा जा रहा है, ताकि इलाज की स्थिति पर नजर रखी जा सके.
विस्थापित जानवरों के इलाज की भी व्यवस्था
बाढ़ के कारण दियारा इलाके से बड़ी संख्या में पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर लाया गया है. इनके लिए अलग मेडिकल कैंप में जरूरी दवाओं की व्यवस्था की गई है.
पशुओं में चोट, घाव, अपच, भूख नहीं लगने और अन्य आपात स्थिति से जुड़ी दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. बाढ़ के पानी और नाव के जरिए स्थान बदलने के दौरान घायल हुए पशुओं का भी इलाज किया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार जरूरत रहने तक यह चिकित्सा सेवा जारी रखी जाएगी.
24 घंटे मेडिकल सेवा का दावा
बाढ़ पीड़ितों के लिए लगाए गए मेडिकल कैंप में 24 घंटे सेवा उपलब्ध रखने की बात कही गई है. बाढ़ के कारण बीमार पड़ने वाले लोगों को यहां डॉक्टरों की मदद से उपचार और दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.
हालांकि, कई विस्थापित परिवारों की प्राथमिक चिंता अभी भी सुरक्षित ठिकाने की है. घरों में पानी भरने के बाद उन्हें बच्चों, बुजुर्गों और पशुओं के साथ खुले या अस्थायी स्थानों पर रहने की मजबूरी है.
नेपाल की त्रासदी के बाद बिहार में बढ़ी चिंता
नेपाल में भारी बारिश और तबाही के बाद बिहार की कई नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है. पटना में भी गंगा के बढ़ते पानी का असर दियारा इलाकों में दिखाई दे रहा है. बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने घर, भोजन, इलाज और सुरक्षित आश्रय की चुनौती एक साथ खड़ी है.
जिला प्रशासन की ओर से सामुदायिक किचन और मेडिकल कैंप के जरिए राहत पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. वहीं, बाढ़ पीड़ितों की मांग है कि भोजन और इलाज के साथ उनके लिए सुरक्षित रहने और रात में सोने की स्थायी व्यवस्था भी की जाए.