बालू को लेकर आमजनों की समस्याओं के समाधान की दिशा में राज्य सरकार की नयी पहल
हाजीपुर : कई महीनों से राज्य में आमजनों को बालू की खरीदारी संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. आम लोगों तक आसानी से बालू की उपलब्धता सुनिश्चित करने के मकसद से राज्य सरकार ने नयी पहल की है. इसके तहत बालू-गिट्टी की खरीदारी के संबंध में अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न प्रचार माध्यमों का सहारा लिया जायेगा.
अंचल स्तर पर इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार की योजना बनी है. 534 अंचल मुख्यालयों में होर्डिंग व फ्लैक्स सहित अन्य माध्यमों से अद्यतन जानकारी आमजनों तक पहुंचायी जायेगी. खान व भूतत्व विभाग के अधिकारियों द्वारा उक्त योजना के क्रियान्वयन को लेकर काफी गंभीरता के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है. खान व भूतत्व विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बालू-गिट्टी मंगवाने के तरीके के बारे में आम लोगों को पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है. बिहार राज्य खनन निगम लिमिटेड के पास बालू व गिट्टी की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध रहने के बावजूद उसके खरीदार कम आ रहे हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
बालू के अवैध खनन व कारोबार की निगरानी निरंतर करते रहने के निर्देश सरकार की ओर से दिये गये है. सरकारी निर्देशों के तहत अंचल मुख्यालय सजग है. लेकिन बालू-गिट्टी को लेकर अंचल स्तरीय व्यापक प्रचार-प्रसार के सरकारी निर्देश अब तक अंचल कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराये गये हैं
दिनेश प्रसाद, सीओ, सदर अंचल
सैकड़ों फोन आते हैं निगम कार्यालय में
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार राज्य खनन निगम लिमिटेड के कार्यालय में रोजाना सैकड़ों फोन आते हैं. फोन पर लोगों द्वारा बालू-गिट्टी की खरीदारी से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है. खरीदने व मंगवाने की प्रक्रिया की जानकारी की मांग तो आमजन फोन पर करते हैं लेकिन निगम कार्यालय को खरीदारी को लेकर उनमें से कम ही लोग ऑर्डर देते है. राज्य के खनन व भूतत्व विभाग ने बालू-गिट्टी के कारोबार व आमजनों तक इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी खनन निगम लिमिटेड को दी है. लघु खनिजों की खरीदारी के लिए तीन माध्यम निर्धारित किये गये है. पहले नियम के अनुसार लोग फोन पर ऑर्डर दे सकते हैं. दूसरे के अनुसार निगम की वेबसाइट पर ऑनलाइन ऑर्डर भी दे सकते हैं. तीसरे माध्यम के प्रावधान के अनुसार खुदरा विक्रेताओं के यहां पहुंच कर भी ऑर्डर दिया जा सकता है. आधार कार्ड की अनिवार्यता भी उक्त मामले में बतायी गयी है. संबंधित व्यक्ति तक बालू-गिट्टी पहुंचते ही उन्हें भुगतान करना होगा. बड़े व छोटे ग्राहकों के लिए बालू का कोटा भी तय किया गया है. सूत्रों के अनुसार बालू-गिट्टी की जरूरतों के बावजूद ग्राहकों की कम संख्या की बड़ी वजह खरीदारी की प्रक्रिया की जानकारी नहीं होना है. पूर्व में अन्य प्रचार माध्यमों के अलावा सरकार ने समाचार पत्रों के माध्यम से भी अद्यतन जानकारी उक्त संबंध में उपलब्ध कराने का प्रयास किया था. लेकिन उन प्रचार का व्यापक प्रभाव नहीं दिखने के कारण नये विकल्प की तलाश की गयी है.
