बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम को ले शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण

कार्यशाला की अध्यक्षता शिक्षाविद् डॉ निखिल कुमार सिंह ने की

सुपौल. राज्य शिक्षा शोध व प्रशिक्षण परिषद बिहार, बिहार काउंसिल ऑन साइंस एंड टेक्नोलॉजी पटना व साइंस फॉर सोसाइटी, बिहार (जिला शाखा सुपौल) के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को स्थानीय इंजीनियरिंग कॉलेज, सुपौल में द्वितीय बिहार बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम 2025 के लिए शिक्षकों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण सह दिशानिर्देशन कार्यशाला आयोजित की गई. इस वर्ष कार्यशाला का मुख्य विषय रहा खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन. कार्यशाला की अध्यक्षता शिक्षाविद् डॉ निखिल कुमार सिंह ने की, जबकि उद्घाटन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा) आलोक शेखर आनंद, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अजय कुमार, प्राचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज डॉ एएन मिश्रा, जिला समन्वयक राजीव कुमार और जितेन्द्र कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया. महाविद्यालय की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम का माहौल उल्लासपूर्ण बना दिया. प्राचार्य डॉ एएन मिश्रा ने कहा कि बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने के लिए प्रयोग व गतिविधि आधारित शिक्षण अनिवार्य है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी आलोक शेखर आनंद ने वैज्ञानिक सोच और रचनात्मक कार्यों को स्थानीय समस्याओं के समाधान का जरिया बताया. उन्होंने आईसीटी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता व सुदूर संवेदन तकनीक की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला. अध्यक्षीय भाषण में डॉ निखिल कुमार सिंह ने अनुसंधान में लगन, संयम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया तथा कहा कि विकास कार्य प्रकृति को क्षति पहुंचाए बिना होने चाहिए. जिला समन्वयक राजीव कुमार ने बाल विज्ञान शोध कार्यक्रम को प्रतिभाशाली बच्चों को तलाशने और तराशने का मंच बताया. जितेन्द्र कुमार ने खाद्य संसाधन प्रबंधन को वैश्विक चुनौती बताते हुए शिक्षकों को परियोजना निर्माण और प्रेजेंटेशन की बारीकियों से अवगत कराया. अवधेश कुमार ने सफल परियोजना की विशेषताओं पर प्रकाश डाला. जबकि डॉ प्रणव कुमार सिंह ने परियोजना निर्माण की चुनौतियों की चर्चा की. वहीं डॉ सुरेंद्र यादव ने सुपौल जिले के बाल वैज्ञानिकों की उपलब्धियों का उल्लेख कर आयोजन समिति को शुभकामनाएं दी. कार्यशाला में जिले के 117 से अधिक विद्यालयों के शिक्षक शामिल हुए. संचालन एवं तकनीकी प्रबंधन में श्रवण कुमार, शंकर कुमार और संतोष कुमार की अहम भूमिका रही. शिक्षक सोनू कुमार, जो पूर्व में बाल वैज्ञानिक रह चुके हैं, ने अपने अनुभव भी साझा किए. अंत में रीता कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया.

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