सुपौल-अररिया मार्ग होगा चौड़ा, 1547 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी

बाईपास से शहरों पर कम होगा दबाव

– एनएच-327 ई का होगा ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन, बायपास से शहरों को मिलेगी राहत सुपौल. सुपौल जहां कोसी नदी की लहरों के साथ-साथ इतिहास, संस्कृति और संघर्ष की कहानियां भी बहती है. यह जिला न केवल कोसी अंचल का हिस्सा है, बल्कि संकट और संभावनाओं की सबसे सशक्त मिसाल भी है. कोसी की पहचान कोसी नदी के बिना अधूरी है, क्योंकि इसके कारण हर साल बाढ़ आती थी, लेकिन यही कोसी आज सुपौल की उपजाऊ मिट्टी, मछली पालन और कृषि की रीढ़ बन गयी है. सरकार की योजना तटबंध के अंदर व बाहर दोनों ओर दिख रही है. इसी कड़ी में कोसी और सीमांचल की जनता के लिए बड़ी सौगात मिली है. ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के प्रयास से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग 327 ई (परसरमा से अररिया तक 102.193 किमी) मार्ग को पेव्ड शोल्डर सहित 02 लेन में ब्राउनफील्ड अपग्रेडेशन करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है. इस परियोजना पर कुल 1547.55 करोड़ की लागत आएगी. बाईपास से शहरों पर कम होगा दबाव यह परियोजना विशेष रूप से सुपौल, पिपरा, त्रिवेणीगंज और रानीगंज जैसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है. इन इलाकों के लिए बाईपास बनाए जाएंगे, जिससे भारी वाहनों का दबाव कम होगा और शहरों के भीतर यातायात सुगम एवं सुरक्षित बनेगा. सामाजिक-आर्थिक विकास को मिलेगा बल इस मार्ग विकास परियोजना से न केवल यात्रा का समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी. खासकर इस इलाके की पारंपरिक और प्रमुख आजीविका जैसे मखाना उत्पादन, मत्स्यपालन, मक्का उत्पादन, दुग्ध उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय छोटे उद्यम को सीधा लाभ मिलेगा. बेहतर सड़क संपर्क से किसानों और व्यापारियों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी. भविष्य की जरूरतों का भी ख्याल इस परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह न केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भविष्य की ट्रैफिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक सतत और दूरदर्शी समाधान भी प्रदान करेगी. इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा. इस महत्वपूर्ण परियोजना की घोषणा से सुपौल और आसपास के जिलों में खुशी की लहर है. लंबे समय से इस सड़क के चौड़ीकरण की मांग उठ रही थी. अब केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद लोगों को उम्मीद है कि क्षेत्र की कनेक्टिविटी और विकास की रफ्तार और तेज होगी. प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से मिलेगा रोजगार निर्माण कार्य के दौरान हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा. वहीं, परियोजना पूरी होने के बाद व्यापारिक गतिविधियों के विस्तार से स्थायी रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. खासकर परिवहन, लॉजिस्टिक्स, होटल-धंधे और सर्विस सेक्टर में स्थानीय युवाओं को अधिक मौके मिलेंगे. कोसी क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक धरोहर से समृद्ध है. बेहतर सड़क सुविधा के बाद यहां पर्यटन उद्योग को भी नई दिशा मिलेगी. नेपाल सीमा के नजदीक होने के कारण सीमा-पार व्यापार और आवागमन भी सुलभ होगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मार्ग का महत्व बढ़ेगा. ग्रामीण अर्थव्यवस्था का प्रमुख हिस्सा कृषि है. खेतों से बाजार तक फसल पहुंचाने में सड़कें अहम भूमिका निभाती हैं. नए मार्ग के जरिए किसानों को बेहतर दाम पर समय पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >