क्या देशभक्ति सिर्फ सीमा पर बंदूक थामे खड़े रहने का नाम है? स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच सुपौल के वीरपुर में सरहद की सुरक्षा करने वाले जांबाज जवानों ने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जिसे देखकर हर देशवासी का सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा. 'हर घर तिरंगा' अभियान के बीच जवानों ने एक ऐसा बड़ा कदम उठाया है, जिसने राष्ट्रसेवा की एक नई और बेहद खूबसूरत परिभाषा लिख दी है. इस अनोखे कदम की चर्चा अब पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई है और हर कोई जवानों के इस जज्बे को सलाम कर रहा है.
तिरंगे की आन-बान के बीच अचानक अस्पताल में जुटने लगे जांबाज
यह पूरी कहानी सुपौल जिले के वीरपुर की है, जहां शुक्रवार को 45वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान अचानक वाहिनी चिकित्सालय परिसर में जुटने लगे. आमतौर पर मुस्तैदी से सीमाओं की रक्षा करने वाले इन जवानों के चेहरों पर इस बार देश के भीतर एक बड़ी जंग जीतने की चमक थी. मौका था 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत आयोजित एक विशेष रक्तदान शिविर का. कमांडेंट गौरव सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में जवानों ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मानवता की रक्षा के लिए अपने खून का महादान कर दिया.
बंदूक छोड़ जब जांबाजों ने बढ़ाया जिंदगी बचाने का हाथ
सीमाओं पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले इन जवानों ने इस शिविर के जरिए पूरे समाज को एक बेहद गहरा संदेश दिया है. जवानों का मानना है कि देशभक्ति केवल सीमा की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत के समय देश के नागरिकों की जान बचाना और मानवता की सेवा करना भी राष्ट्रसेवा का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस पुनीत कार्य में जिला सदर अस्पताल, सुपौल के ब्लड बैंक की विशेष टीम भी वीरपुर पहुंची थी, जिसने पूरी रक्तदान प्रक्रिया को बहुत ही सुचारू और सुरक्षित तरीके से पूरा कराया.
महादान की गूंज और भविष्य का बड़ा संकल्प
इस खास मौके पर वाहिनी के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान कमांडेंट (मेडिकल) नरेश कुमार, द्वितीय कमान अधिकारी जगदीश कुमार शर्मा और कमांडेंट प्रवीण कुमार कौशिक की गरिमामयी उपस्थिति ने जवानों का हौसला दोगुना कर दिया. अधिकारियों ने एकजुट होकर रक्तदान को दुनिया का सबसे बड़ा दान यानी 'महादान' बताया. उन्होंने कहा कि एक सैनिक सीमा पर खून बहाकर देश बचाता है और यहाँ खून दान करके किसी बेबस मरीज को नया जीवन दे रहा है. 45वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल ने साफ किया है कि वे भविष्य में भी जनहित और सामाजिक सरोकार से जुड़े इस तरह के जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को निरंतर चलाते रहेंगे.
