शहर से लेकर गांव तक तेजी से फैल रहा स्मैक का नेटवर्क, कानून व्यवस्था के लिये गंभीर चुनौती

स्मैक पर अंकुश लगाने के लिए गोलबंद हुए बुद्धिजीवी वर्ग के लोग

– शराबबंदी के बाद नशे का खतरनाक रूप बनता जा रहा स्मैक – स्मैक पर अंकुश लगाने के लिए गोलबंद हुए बुद्धिजीवी वर्ग के लोग – हाथों में बैनर-पोस्ट व तख्ती लेकर नशाबंदी के प्रति लोगों को किया जागरूक प्रतापगंज. प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सूरजापुर पंचायत में नशा मुक्ति को लेकर हाजी नजीबुल्लाह प्लस टू हाई स्कूल के मैदान में रविवार को समाज के सभी वर्गों के लोग उपस्थित हुए. अध्यक्षता नशा मुक्ति के अध्यक्ष जफरुल हसन ने की. इस मौके पर मंच पर उपस्थित पूर्व विधायक लखन ठाकुर, सुखानगर पंचायत के मुखिया रंजीत प्रसाद सिंह, थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार, संतोष भिंडवार, सुशील नाग उर्फ (बौआ), पूर्व मुखिया वासुदेव रजक, खालिद अनवर, खुर्शीद उर्फ भोला, ज्योतिष कुमार, विजय तेथवार, जय प्रकाश पासवान आदि उपस्थित थे. मंच संचालन सूरजापुर पंचायत के मुखिया महानंद पासवान ने किया. बैठक में उपस्थित पंचायत के महिला एवं पुरुष, छात्र-छात्रा, बुजुर्ग एवं नौजवान शामिल हुए. इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री ठाकुर ने कहा कि शराबबंदी के बाद जिले में नशे का सबसे खतरनाक रूप स्मैक के रूप में सामने आया है. शराब पर रोक के बाद नशे का बाजार खत्म होने की बजाय स्मैक जैसे जानलेवा नशे की ओर शिफ्ट हो गया है. शहर से लेकर गांव तक स्मैक का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है. जिसने न केवल कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी, बल्कि समाज की जड़ों को भी कमजोर कर दिया है. इस अवसर पर सुखानगर पंचायत के मुखिया रंजीत प्रसाद सिंह ने कहा कि स्थानीय लोगों के अनुसार पहले जहां शराब का चलन अधिक था, वहीं अब स्मैक ने उसकी जगह ले ली है. स्कूल-कॉलेज के आसपास, चाय की दुकानों, ढाबा और सुनसान इलाकों में स्मैक की पुड़िया की चोरी-छुपे बिक्री आम बात हो गई है. सबसे चिंताजनक पहलू या है कि किशोर और युवा वर्ग तेजी से इसके गिरफ्त में आ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि स्मैक बेहद खतरनाक और नशे की लत लगाने वाला पदार्थ है. इसके सेवन से शरीर धीरे-धीरे कमजोर होता है. मानसिक संतुलन भी बिगड़ जाता है. स्मैक की लत में फंसे कई युवा चोरी, छिनतई और लूट जैसी आपराधिक घटनाओं में शामिल हो रहे हैं. अभिभावकों का कहना है कि नशे का कारण बच्चों की पढ़ाई छूट रही है उनका भविष्य अंधकार में डूबता जा रहा है. थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि स्मैक की बिक्री छोटे-छोटे पैकेट और पुड़िया में होने के कारण पुलिस के लिए यह बड़ी चुनौती बन गया है. तस्कर नए-नए तरीके अपना कर स्मैक की आपूर्ति कर रहे हैं. शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी इसकी पहुंच बढ़ चुकी है. पुलिस द्वारा समय-समय पर छापेमारी कर स्मैक बरामद की जा रही है. तस्करों की गिरफ्तारी भी हो रही है. लेकिन इसके बावजूद यह अवैध धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंच की अध्यक्षता कर रहे जफरूल हसन ने कि कहा पहले स्मैक का कारोबार सीमित इलाकों तक सिमटा हुआ माना जाता था. लेकिन अब यह गांव-गांव तक फैल चुका है. युवा, मजदूर, छात्र और बेरोजगार युवा इसकी चपेट में सबसे अधिक आ रहे है. सीमा क्षेत्र और बाहरी नेटवर्क की भूमिका के कारण इसमें तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाना प्रशासन के लिए कठिन साबित हो रहा है. बुद्धिजीवियों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से स्मैक की समस्या का समाधान संभव नहीं है. इसके लिए स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम, अभिभावकों की सतर्कता और समाज की सामूहिक भागीदारी जरूरी है. युवाओं को शिक्षा, रोजगार और खेलकूद से जोड़कर ही स्मैक जैसे खतरनाक नशे पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है. शराबबंदी के बाद स्मैक का बढ़ता चलन जिले के लिए गंभीर चेतावनी है. यदि समय रहते ठोस और सख्त कदम नहीं उठाए गए तो इसमें आने वाली पीढ़ी को बर्बादी की ओर धकेल सकता है. बैठक समाप्त होने के पश्चात सूरजापुर पंचायत के मुख्य मार्ग से बैनर पोस्टर के साथ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण, समाज के सभी वर्गों के लोग हाथों में तख्ती लिए हुए पंचायत के कई वार्डों में भ्रमण करते हुए पुनः सभा स्थल पर पहुंचकर शपथ लिए.

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