Panchayat Delimitation 2026: छातापुर (सुपौल) में पंचायत चुनाव से जुड़ी एक अहम प्रशासनिक प्रक्रिया अब डिजिटल होने जा रही है. छातापुर प्रखंड में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था की इकाइयों के नये सिरे से परिसीमन का काम शनिवार से शुरू कर दिया गया. इस बार परिसीमन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जायेगी.
इसके तहत पंचायत और वार्ड की सीमाओं के पुनर्निर्धारण के लिए तकनीकी स्तर पर मैपिंग और डेटा अपलोड किया जायेगा. प्रत्येक वार्ड के क्षेत्र को मौके पर जाकर चिह्नित करने और उसकी जानकारी ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज करने की प्रक्रिया अपनायी जायेगी.
पंचायत परिसीमन 2026 को लेकर शनिवार को ई-किसान भवन में तकनीकी कर्मियों के लिए कार्यशाला आयोजित की गयी. इसमें कर्मियों को ऑनलाइन परिसीमन की पूरी प्रक्रिया और तकनीकी कार्यों की जानकारी दी गयी.
क्यों जरूरी है पंचायत परिसीमन?
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की इकाइयों की सीमाओं को नये सिरे से निर्धारित करने के लिए परिसीमन किया जाता है. इसका उद्देश्य पंचायत और वार्ड की सीमाओं का निर्धारित मानकों के अनुसार पुनर्निर्धारण करना है.
छातापुर के बीडीओ डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन माध्यम और GIS मैपिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि ‘एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य’ की सशक्त व्यवस्था के लिए परिसीमन आवश्यक है.
इसका सीधा संबंध पंचायत स्तर पर क्षेत्र की सीमाओं और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था से है. इसलिए परिसीमन की प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
ई-किसान भवन में तकनीकी कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण
परिसीमन के काम को सुचारु रूप से पूरा कराने के लिए ई-किसान भवन में कार्यशाला आयोजित की गयी.
बीडीओ डॉ. राकेश गुप्ता ने कार्यशाला में शामिल कर्मियों को मानचित्र डाउनलोड करने, ईवी सीमा जोड़ने और क्षेत्र से एकत्र किये गये नये परिसीमन डेटा की मैपिंग कर उसे ऑनलाइन अपलोड करने की जानकारी दी.
प्रशिक्षण के दौरान सभी संबंधित कर्मियों के मोबाइल में परिसीमन ईवी एप डाउनलोड कराया गया.
कार्यशाला में कार्यपालक सहायक, पीटीए, जेई, लेखापाल, पंचायत सचिव समेत अन्य तकनीकी एवं संबंधित कर्मी शामिल हुए.
एप के जरिए कैसे होगी वार्ड की मैपिंग?
प्रशिक्षण में कर्मियों को ऑनलाइन परिसीमन की प्रक्रिया भी समझायी गयी.
बताया गया कि 2011 की जनगणना वाले ईबी मॉनिटरिंग एप को खोलने के बाद संबंधित विकल्प से मानचित्र डाउनलोड किया जा सकता है. इसके बाद पंचायत का चयन करने पर संबंधित ईबी का विकल्प मिलेगा और उसे चुनने के बाद मैप खुलेगा.
प्रत्येक वार्ड के ईबी एक या उससे अधिक हो सकते हैं. प्रत्येक ईबी के लिए नौ प्वाइंट निर्धारित किये गये हैं.
इन प्वाइंट को स्थल पर जाकर चिह्नित करना होगा और संबंधित जानकारी को ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड करना होगा.
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य कागजी प्रक्रिया के बजाय डिजिटल मैपिंग के माध्यम से परिसीमन की सीमाओं को दर्ज करना है.
शनिवार से ही शुरू हुआ परिसीमन का काम
प्रशिक्षण के बाद बीडीओ ने कर्मियों को शनिवार से ही परिसीमन का कार्य शुरू करने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि निर्धारित मानकों के अनुरूप ऑनलाइन माध्यम से परिसीमन का काम किया जाये और प्रक्रिया के प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाये.
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की इकाइयों की सीमाओं के पारदर्शी एवं पूर्ण पुनर्निर्धारण के लिए GIS मैपिंग का समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाना है.
इसलिए संबंधित कर्मियों को तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी देने के साथ समय पर काम पूरा करने की जिम्मेदारी भी दी गयी है.
डेटा और जमीन की स्थिति को जोड़ा जायेगा
इस परिसीमन प्रक्रिया में केवल ऑनलाइन डेटा दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं होगा. निर्धारित प्वाइंट की जानकारी स्थल पर जाकर अपलोड करनी होगी.
इससे मैप पर दर्ज क्षेत्र और वास्तविक स्थल की स्थिति को आपस में जोड़ा जा सकेगा. स्थानीय स्तर पर पंचायत और वार्ड की सीमाओं को सही तरीके से चिह्नित करना इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा.
प्रशासन का जोर है कि परिसीमन में किसी तरह की अस्पष्टता न रहे और पूरी प्रक्रिया निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार पूरी हो.
Panchayat Delimitation 2026: आईटी असिस्टेंट ने समझायी ऑनलाइन प्रक्रिया
प्रशिक्षण के दौरान आईटी असिस्टेंट संतोष कुमार ने भी कर्मियों को परिसीमन की ऑनलाइन विधि की विस्तृत जानकारी दी.
उन्होंने एप के माध्यम से मानचित्र खोलने, पंचायत और ईबी का चयन करने तथा आवश्यक जानकारी अपलोड करने की प्रक्रिया समझायी.
तकनीकी कर्मियों को मौके पर जाकर निर्धारित प्वाइंट की मैपिंग करने के तरीके की भी जानकारी दी गयी.
अब प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रखंड क्षेत्र में परिसीमन से जुड़ी मैपिंग और डेटा अपलोडिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
