सुपौल में मनरेगा घोटाले का खुलासा, बिना अनुमति सैकड़ों योजनाएं ऑनलाइन मार्क

मामले की गंभीरता को देखते हुए 7 मई 2026 को त्रिसदस्यीय जांच दल का गठन किया गया था. जांच दल ने विभिन्न प्रखंडों में ऑनलाइन मार्क की गई योजनाओं एवं उपलब्ध अभिलेखों की जांच कर 13 मई 2026 को अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी.

जांच में 991 में से 899 योजनाएं बिना स्वीकृति ऑनलाइन मार्क होने का खुलासा, बड़ी कार्रवाई के तहत सेवा समाप्त

सुपौल से राजीव झा की रिपोर्ट:

सुपौल: जिला ग्रामीण विकास अभिकरण, सुपौल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत डीपीसी लॉगिन के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है. जांच में खुलासा हुआ है कि जिला वित्त प्रबंधक (बीआरडीएस) विशाल कुमार ने सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बिना सैकड़ों योजनाओं को डीपीसी लॉगिन से ऑनलाइन मार्क कर दिया.

मामले की गंभीरता को देखते हुए 7 मई 2026 को त्रिसदस्यीय जांच दल का गठन किया गया था. जांच दल ने विभिन्न प्रखंडों में ऑनलाइन मार्क की गई योजनाओं एवं उपलब्ध अभिलेखों की जांच कर 13 मई 2026 को अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी.

जांच रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 991 मनरेगा योजनाओं को डीपीसी लॉगिन से ऑनलाइन मार्क किया गया था. इनमें से केवल 92 योजनाओं को ही सक्षम प्राधिकार से विधिवत स्वीकृति प्राप्त थी, जबकि शेष 899 योजनाओं को निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने ढंग से ऑनलाइन मार्क कर दिया गया.

जांच में सबसे अधिक अनियमितता जल संरक्षण एवं जल संचयन तथा बाढ़ नियंत्रण एवं सुरक्षा योजनाओं में पाई गई. रिपोर्ट के अनुसार 358 योजनाएं जल संरक्षण एवं जल संचयन से संबंधित थीं, जबकि 306 योजनाएं बाढ़ नियंत्रण एवं सुरक्षा कार्यों की थीं. इसके अलावा ग्रामीण अधोसंरचना, ग्रामीण संपर्कता, सूक्ष्म सिंचाई एवं पारंपरिक जल निकायों के नवीकरण से जुड़ी योजनाओं में भी अनियमितता सामने आई.

प्रखंडवार जांच में मरौना, निर्मली, सुपौल, छातापुर एवं किशनपुर सहित कई प्रखंडों में बड़ी संख्या में बिना स्वीकृति योजनाओं को ऑनलाइन मार्क किए जाने का खुलासा हुआ है.

मामले में जिला वित्त प्रबंधक विशाल Kumar से 14 मई 2026 को स्पष्टीकरण मांगा गया था. विभागीय आदेश के अनुसार नोटिस की तामिला होने के बावजूद उन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई जवाब नहीं दिया. जांच रिपोर्ट में कहा गया कि संबंधित कर्मी उस अवधि में कार्यालय में उपस्थित थे तथा उपस्थिति पंजी में उनके हस्ताक्षर भी दर्ज थे. इसके बावजूद स्पष्टीकरण नहीं देना गंभीर लापरवाही एवं उच्चाधिकारियों के आदेश की अवहेलना माना गया.

मामले को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी सावन कुमार ने बिहार रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (बीआरडीएस) के अनुशासनिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए विशाल कुमार की अनुबंध सेवा समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया.

आदेश में यह भी कहा गया है कि संबंधित कर्मी अपने विरुद्ध पारित दंडादेश के खिलाफ 30 दिनों के भीतर ग्रामीण विकास विभाग, बिहार के प्रधान सचिव के समक्ष अपील कर सकते हैं.

मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में इतनी बड़ी संख्या में बिना स्वीकृति योजनाओं के ऑनलाइन मार्क होने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. जिला प्रशासन ने इसे वित्तीय एवं प्रशासनिक अनुशासन का गंभीर उल्लंघन माना है.

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Published by: Shruti Kumari

Shruti Kumari is a contributor at Prabhat Khabar.

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