Aaj Ka Darshan: राघोपुर (सुपौल) से आशुतोष झा की रिपोर्ट. सुपौल जिले के राघोपुर प्रखंड स्थित धरहरा का बाबा भीमशंकर महादेव मंदिर आज लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है. हर दिन यहां भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यह मंदिर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूब जाता है. हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता मंदिर परिसर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनोखा अनुभव कराता है.
महाभारत काल से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बाबा भीमशंकर महादेव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. कहा जाता है कि इस प्राचीन मंदिर की स्थापना पांडवों ने की थी. यही वजह है कि मंदिर को लेकर लोगों में गहरी श्रद्धा देखने को मिलती है.
समय के साथ यह मंदिर सिर्फ सुपौल जिले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के कई जिलों और पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचने लगे हैं. खास अवसरों पर यहां भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं.
सुबह 4 बजे खुलता है मंदिर का पट
मंदिर समिति के सचिव संजीव यादव के अनुसार सामान्य दिनों में मंदिर का पट सुबह 4 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है और रात 9 बजे तक दर्शन-पूजन जारी रहता है. सुबह 8 बजे से 9 बजे के बीच भगवान शिव को भोग लगाया जाता है, जबकि रात 8 बजे से 9 बजे तक बाबा भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार पूजन किया जाता है.
श्रृंगार पूजा के समय मंदिर परिसर का वातावरण बेहद आकर्षक और भक्तिमय हो जाता है. दूर-दूर से आए श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य का हिस्सा बनने के लिए मंदिर पहुंचते हैं.
सावन और शिवरात्रि में उमड़ती है भारी भीड़
सावन माह और महाशिवरात्रि के दौरान बाबा भीमशंकर महादेव मंदिर में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस दौरान पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठता है. भक्त जलाभिषेक कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं.
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल
जानकारी के अनुसार सरकार की ओर से इस ऐतिहासिक मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में पहल भी की गई थी. तत्कालीन जिलाधिकारी ने मंदिर परिसर का निरीक्षण कर विकास को लेकर रोडमैप तैयार कराया था.
आज बाबा भीमशंकर महादेव मंदिर केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है.
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