सुपौल : लगातार बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और प्रकृति से हो रही छेड़छाड़ के बीच सुपौल में गजना धार के किनारे प्रकृति की एक खूबसूरत तस्वीर अब भी दिखाई देती है. धार के किनारे वर्षों से खड़े पेड़ों पर इन दिनों बड़ी संख्या में हरे-भरे तोतों का झुंड नजर आ रहा है. सुबह और शाम पेड़ों पर मंडराते और चहचहाते तोतों की आवाज राहगीरों और स्थानीय लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है.
एक साथ दर्जनों तोतों का पेड़ों की डालियों पर बैठना और अचानक झुंड बनाकर उड़ान भरना गजना धार के प्राकृतिक परिवेश को जीवंत कर देता है. यह दृश्य जहां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, वहीं बदलते पर्यावरण के बीच प्रकृति के बचे हुए हिस्से की कहानी भी कहता है.
पेड़ों पर मिला पक्षियों को सुरक्षित आशियाना
गजना धार के किनारे मौजूद पेड़ सिर्फ इलाके की हरियाली बनाए रखने में ही अहम भूमिका नहीं निभा रहे, बल्कि विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के लिए आश्रय भी बने हुए हैं. इन्हीं पेड़ों पर तोतों ने अपना बसेरा बना रखा है.
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले गांव और शहर के आसपास बड़ी संख्या में अलग-अलग प्रजातियों के पक्षी आसानी से दिखाई देते थे. लेकिन पेड़ों की संख्या कम होने, जलस्रोतों के स्वरूप में बदलाव और लगातार बढ़ते निर्माण कार्यों ने पक्षियों के प्राकृतिक आवास को प्रभावित किया है.
पेड़ कटे तो खत्म हो जाएगा पक्षियों का आशियाना
पर्यावरण प्रेमी भगवान जी पाठक का कहना है कि किसी स्थान पर बड़ी संख्या में पक्षियों का मौजूद होना वहां के प्राकृतिक वातावरण के अनुकूल होने का संकेत है. गजना धार के किनारे पेड़ों पर तोतों के झुंड का बसेरा यह बताता है कि यहां अभी भी पक्षियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां मौजूद हैं.
उन्होंने कहा कि इन पेड़ों और धार के आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र को संरक्षित करना बेहद जरूरी है. मानवीय गतिविधियों के बढ़ने के साथ पेड़ों की कटाई और जलस्रोतों के अतिक्रमण जैसी समस्याएं पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं.
जलस्रोत और हरियाली बचाना जरूरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पेड़ों और प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाने लगातार कम होते जाएंगे. गजना धार के किनारे मौजूद पेड़-पौधे आज भी पक्षियों को ऐसा वातावरण दे रहे हैं, जहां वे अपना बसेरा बना सकें.
लोगों ने धार के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने और पेड़ों को संरक्षित करने की जरूरत जताई है. उनका कहना है कि प्रकृति ने इस इलाके को जो खूबसूरती दी है, उसे बचाने की जिम्मेदारी भी समाज की है.
तोतों की चहचहाहट दे रही संरक्षण का संदेश
फिलहाल गजना धार के किनारे पेड़ों पर बैठे तोतों का झुंड लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. प्रकृति से लगातार छेड़छाड़ के बीच यह नजारा एक अहम संदेश भी देता है - पेड़ और जलस्रोत बचेंगे, तभी पक्षियों के आशियाने बचेंगे और प्रकृति की यह चहचहाहट भी कायम रहेगी.
