चालकों के लिए मुफ्त नेत्र जांच शिविर 30 को, बच्चों को मिला सीपीआर का प्रशिक्षण

मुफ्त नेत्र जांच, सुरक्षित ड्राइविंग की पहली शर्त

सुपौल. सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने व सुरक्षित यातायात संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार सरकार द्वारा संचालित सड़क सुरक्षा माह 2026 के अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा लगातार प्रभावी और जनहितकारी पहल की जा रही है. इसी क्रम में एक ओर जहां वाहन चालकों की दृष्टि क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर बच्चों और किशोरों को कम उम्र से ही सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए विद्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. जिलाधिकारी के निर्देशानुसार जिला परिवहन कार्यालय के तत्वावधान में दिनांक 30 जनवरी 2026 को बस स्टैंड, सुपौल परिसर में वाहन चालकों के लिए निःशुल्क नेत्र जांच एवं मुफ्त चश्मा वितरण शिविर का आयोजन किया जाएगा. यह शिविर पूर्णतः निःशुल्क एवं जनहित में आयोजित किया जा रहा है. मुफ्त नेत्र जांच, सुरक्षित ड्राइविंग की पहली शर्त शिविर में जिले के सभी प्रकार के वाहन चालकों बस, ट्रक, ऑटो, ई-रिक्शा, टेम्पो, टैक्सी सहित अन्य व्यावसायिक वाहनों के चालकों की आंखों की निःशुल्क जांच अनुभवी चिकित्सकों द्वारा की जाएगी. जांच के दौरान दृष्टि क्षमता का परीक्षण, आंखों से संबंधित प्रारंभिक रोगों की पहचान व आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया जाएगा, जिससे वाहन चालक अपनी वास्तविक दृष्टि स्थिति से अवगत हो सकें. विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में कमजोर दृष्टि एक अहम वजह है. धुंधला दिखाई देना, रात में कम दिखना, आंखों में जलन या समय पर नेत्र जांच न कराना वाहन संचालन को अत्यंत जोखिमपूर्ण बना देता है. कई बार चालक स्वयं यह महसूस नहीं कर पाते कि उनकी दृष्टि क्षमता कमजोर हो चुकी है, जिसका सीधा असर प्रतिक्रिया समय और निर्णय क्षमता पर पड़ता है. जिन वाहन चालकों को चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत चश्मे की आवश्यकता बताई जाएगी, उन्हें जिला परिवहन कार्यालय द्वारा पूर्णतः निःशुल्क चश्मा उपलब्ध कराया जाएगा. बच्चों में जागरुकता: भविष्य की सुरक्षित सड़कें सड़क सुरक्षा माह 2026 के अंतर्गत जिला प्रशासन द्वारा बच्चों एवं किशोर वर्ग में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से जिले के विभिन्न विद्यालयों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. इसी क्रम में 28 जनवरी 2026 को आरएसएम पब्लिक स्कूल में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम सह प्री-हॉस्पिटल एवं सीपीआर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही सड़क सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना व उन्हें सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि वे स्वयं सुरक्षित रहें और अपने परिवार व समाज में भी जागरूकता का संदेश प्रसारित कर सकें. व्यावहारिक जानकारी और जीवन रक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं को सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी दी गई. इसमें ज़ेब्रा क्रॉसिंग का उपयोग, ट्रैफिक सिग्नल और संकेतकों का महत्व, हेलमेट एवं सीट बेल्ट का अनिवार्य प्रयोग, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करना, ओवरस्पीडिंग के दुष्परिणाम व नाबालिगों द्वारा वाहन न चलाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई. इसके साथ ही बच्चों को प्री-हॉस्पिटल केयर एवं सीपीआर का प्रशिक्षण भी दिया गया. बच्चे बनेंगे सड़क सुरक्षा के संदेशवाहक जिला प्रशासन का मानना है कि बच्चे समाज के सबसे प्रभावी संदेशवाहक होते हैं. यदि उन्हें कम उम्र से ही सड़क सुरक्षा का महत्व समझाया जाए, तो वे अपने माता-पिता और आसपास के लोगों को भी सुरक्षित यातायात व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. इसी उद्देश्य से विद्यालय स्तर पर सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है.

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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