करजाईन. थाना क्षेत्र के अधिकांश लोग कृषि एवं पशुपालन पर निर्भर हैं, लेकिन हर वर्ष प्रकृति की मार उन्हें गहरे संकट में डाल देती है. इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की कमर तोड़ दी है. जहां एक ओर महंगाई अपने चरम पर है, वहीं दूसरी ओर खेती में लागत लगातार बढ़ती जा रही है. खेत की जुताई से लेकर फसल तैयार होने तक किसानों को भारी खर्च उठाना पड़ता है, लेकिन यह कोई नहीं जानता कि मेहनत से तैयार की गई फसल खलिहान तक पहुंचेगी भी या नहीं. पिछले कुछ दिनों से तेज हवाओं के साथ हो रही लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. खेतों में पक कर तैयार मक्का की फसल को लेकर किसान बेहद खुश थे, वहीं मूंग और जूट की लहलहाती फसलें भी उनकी उम्मीदों को पंख दे रही थी, लेकिन अचानक बदले मौसम ने इन उम्मीदों को झटका दिया है. खेतों में पानी भर जाने के कारण मूंग और जूट की फसलें बर्बादी की कगार पर है. कहते हैं किसान मोतीपुर निवासी सुभाष झा, गोपाल झा, कुंदन झा, प्रभाष ठाकुर, हरिराहा के मो रहमान, शिबू मंडल, बायसी के कमल मिश्र, किशोर मेहता और मंशापुर के प्रभाष यादव सहित कई किसानों ने दुख व्यक्त करते हुए कहा, ए बेर भगवान एको मुठी मूंग नाय हेबे देते. किसानों का कहना है कि कभी कुदरत का कहर, कभी नहर-नलकूपों की खराबी, तो कभी समय पर खाद-बीज न मिलने की समस्या उनके लिए आम हो गई है. बताते हैं कि मूंग, मक्का और जूट उनकी आय का मुख्य स्रोत हैं, लेकिन बेमौसम बारिश ने इन फसलों को बर्बाद कर दिया है. ऐसे हालात में खेती अब उनके लिए जुआ बन गई है. वर्तमान स्थिति को देखकर किसान बेहद चिंतित हैं और सरकार से राहत एवं सहायता की उम्मीद कर रहे हैं.
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