स्टेशनरी दुकानों में खुलेआम बिक रहा सूखा नशा, सुलेशन सूंघकर बिगड़ रहा बचपन

थाना क्षेत्र में बच्चों के बीच नशे का लत तेजी से फैलता जा रहा है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह नशा अब स्टेशनरी दुकानों से मिल रहे सनफिक्स के माध्यम से हो रहा है.

त्रिवेणीगंज. थाना क्षेत्र में बच्चों के बीच नशे का लत तेजी से फैलता जा रहा है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह नशा अब स्टेशनरी दुकानों से मिल रहे सनफिक्स के माध्यम से हो रहा है. जिसे बच्चे पॉलीथिन या रुमाल में डालकर सूंघते हैं. यह जहरीली प्रवृत्ति न केवल गरीब तबके के बच्चों में देखी जा रही है, बल्कि संपन्न परिवारों के बच्चे भी इसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं. शहर की सड़कों, चौराहों, नहर किनारों और गांवों में छोटे-छोटे बच्चे इसके शिकार होते जा रहे हैं. दिन-प्रतिदिन ऐसे बच्चों की संख्या में इजाफा हो रहा है. मंगलवार को बाजार के बस स्टैंड के तहसील कचहरी के सामने बने बाढ़ आश्रय स्थल ऐसे ही बच्चों की एक टोली देखी. बच्चों ने खुद स्वीकार किया कि उन्हें सनफिक्स आसानी से स्टेशनरी की दुकानों से मिल जाता है. इसके आदि बच्चो ने बताया कि अगर यह नहीं मिले तो बेचैनी और पूरे शरीर में दर्द होने लगता है. सनफिक्स के अलावा, मोटर साइकिल, साइकिल के पंचर बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स और लोशन का भी नशे के तौर पर बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है. यह एक नया और खतरनाक चलन बनता जा रहा है, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है. मामले में जब लोगों से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि पुलिस और सामाजिक संस्थाएं इस गहराते संकट पर आंख मूंदे बैठी हैं. ना तो कोई सघन जांच अभियान चलाया गया है और न ही इसको लेकर जागरूकता की जा रही है. इस उदासीनता के कारण नशे के कारोबारी बेलगाम हो चुके हैं और बच्चों का जीवन बर्बादी की ओर बढ़ रहा है. प्रशासनिक सख्ती और सामाजिक जागरूकता की जरूरत है. यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गयी तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है. मामले को लेकर एसडीपीओ विपिन कुमार ने बताया कि लगातार इस दिशा में कार्रवाई की जा रही है. छापेमारी भी की जा रही है, दोषी को जेल भेज रहे हैं. इस दिशा में पुलिस सख्ती से काम कर रही है.

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By RAJEEV KUMAR JHA

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