त्रिवेणीगंज. अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों को हिलाकर रख दिया है. यहां घायल और गंभीर मरीजों का इलाज डॉक्टर नहीं, बल्कि एम्बुलेंस एएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) रंजीत कुमार मजे से बिना भय के करते हैं. सिलाई, मरहम पट्टी और यहां तक कि महिलाओं का बंध्याकरण ऑपरेशन तक गैर-डॉक्टरों के जिम्मे है. स्वास्थ्य सेवा पर सवालिया निशान सरकार एक ओर स्वास्थ्य सुधार को लेकर बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. अस्पताल प्रशासन की लापरवाही ने मरीजों की जान से खिलवाड़ को आम बना दिया है. डॉक्टरों की अनुपस्थिति में सफाई कर्मी और एएमटी सक्रिय रहते हैं. महिला मरीजों की सेहत दांव पर सबसे चिंताजनक स्थिति महिलाओं की है. बंध्याकरण ऑपरेशन के बाद कई महिलाओं को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. जानकारों का कहना है कि प्रशिक्षित डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी से यह समस्या लगातार बढ़ रही है. जिम्मेदारों की चुप्पी लोग पूछते हैं कि जब ऑपरेशन थियेटर में एएमटी तक की एंट्री है, तो अस्पताल प्रशासन आंख मूंदकर क्यों बैठा है? विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से यह खेल सालों से जारी है. कहते हैं एसडीएम एसडीएम अभिषेक कुमार ने कहा कि मामले की जांच कर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी. वहीं सिविल सर्जन ललन ठाकुर ने कहा कि उन्हें पता नहीं है. पता कर ही कोई जवाब दे सकते हैं. यह कोई बड़ा मामला नहीं है. इमरजेंसी में एएमटी इलाज कर सकते हैं. वह ट्रेंड होता है. इसलिए एम्बुलेंस में रखा जाता है.
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