खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने भेजी अपात्र लाभुकों की सूची, जिले में 1,4 लाख से अधिक नाम चिह्नित

गलत तरीके से नाम हटने पर दर्ज कराई जा सकेगी आपत्ति

– फरवरी से शुरू होगी नाम डिलीट करने की प्रक्रिया – पात्र लाभुकों को नहीं घबराने की जरूरत : जिला आपूर्ति पदाधिकारी फोटो – 01 कैप्सन- जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुपौल सुपौल. खाद्य सुरक्षा योजना के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने और वास्तविक जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए खाद्य एवं आपूर्ति विभाग पटना द्वारा जिले के लिए अपात्र लाभुकों की सूची भेजी गई है. इस सूची में जिले भर के करीब 01 लाख 04 हजार से अधिक लाभुकों के नाम शामिल किए गए हैं, जिन्हें प्रारंभिक जांच में अपात्र माना गया है. विभागीय निर्देश के अनुसार इन नामों को फरवरी माह से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. राज्य स्तर पर हुई जांच के बाद तैयार की गई सूची खाद्य एवं आपूर्ति विभाग पटना द्वारा यह सूची राज्य स्तर पर विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों के मिलान के बाद तैयार की गई है. इसमें आधार डाटा, आयकर दाता, सरकारी सेवा से जुड़े व्यक्ति, चार पहिया वाहन धारक, पेंशनधारी एवं अन्य अपात्र श्रेणी में आने वाले लोगों को चिन्हित किया गया है. जानकारी अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत की जा रही है, ताकि योजना का लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिल सके, जो वास्तव में इसके पात्र हैं. फरवरी से शुरू होगी डिलीटेशन की प्रक्रिया जिला आपूर्ति पदाधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि फरवरी 2026 से नाम डिलीट करने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएगी. सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को सूची उपलब्ध कराई गयी, जिसके बाद पंचायत एवं वार्ड स्तर पर सत्यापन कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी. किसी भी लाभुक का नाम बिना जांच-पड़ताल के नहीं हटाया जाएगा. पात्र लाभुकों को नहीं घबराने की आवश्यकता जिला आपूर्ति पदाधिकारी राजीव कुमार ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि पात्र लाभुकों को किसी भी प्रकार से घबराने की जरूरत नहीं है. यदि किसी व्यक्ति का नाम गलती से अपात्र सूची में आ गया है, तो उसे अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि शिकायत निवारण के लिए प्रखंड आपूर्ति कार्यालय, जन वितरण प्रणाली दुकानदार तथा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते है. किन कारणों से लाभुक माने गए अपात्र विभागीय जानकारी के अनुसार जिन कारणों से लाभुकों को अपात्र सूची में डाला गया है, उनमें प्रमुख रूप से सरकारी नौकरी में कार्यरत व्यक्ति, आयकर दाता, चार पहिया वाहन का स्वामित्व, एक से अधिक राशन कार्ड, परिवार के किसी सदस्य का स्थायी रोजगार, फर्जी या गलत जानकारी देकर राशन कार्ड बनवाना जैसे बिंदु शामिल हैं. यह सूची जिले के सभी प्रखंडों सुपौल सदर, निर्मली, त्रिवेणीगंज, छातापुर, बसंतपुर, राघोपुर, प्रतापगंज, सरायगढ़-भपटियाही एवं किशनपुर, पिपरा को भेज दी गई है. प्रखंड स्तर पर पदाधिकारी संबंधित जन वितरण प्रणाली दुकानदारों के माध्यम से लाभुकों को सूचना दी जा रही है. ताकि समय रहते सत्यापन कराया जा सके. साथ ही उन्होंने कहा कि वैसे लाभुक जिनके आधार संख्या राशन कार्ड के साथ जुड़ा हुआ है. लेकिन पॉश मशीन पर आधार का बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हुआ है. उनको करवाना अनिवार्य है अन्यथा उनका भी खाद्यान्न माह फरवरी से बंद किया जा सकता है. गलत तरीके से नाम हटने पर दर्ज कराई जा सकेगी आपत्ति जिला आपूर्ति पदाधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि यदि किसी लाभुक को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से अपात्र सूची में डाला गया है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर आपत्ति दर्ज करा सकता है. आपत्ति के साथ आवश्यक दस्तावेज जैसे आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, परिवार सूची, आधार कार्ड जमा करना होगा, जिसके बाद पुनः जांच की जाएगी. अपात्र लाभुक हटने से जरूरतमंदों को मिलेगा लाभ विशेषज्ञों का मानना है कि अपात्र लाभुकों के नाम हटने से वास्तविक गरीब और जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ बेहतर तरीके से मिल सकेगा. लंबे समय से यह शिकायत रही है कि कई सक्षम लोग भी सरकारी अनाज का लाभ उठा रहे हैं, जिससे गरीबों का हक प्रभावित होता है. राज्य सरकार का उद्देश्य है कि खाद्य सुरक्षा योजना पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बने. इसी दिशा में लगातार डाटा शुद्धिकरण (डेटा क्लीनिंग) और ई-केवाईसी जैसी प्रक्रियाएं लागू की जा रही हैं. अपात्र लाभुकों को हटाने की यह कार्रवाई उसी का एक अहम हिस्सा मानी जा रही है. इस पूरे अभियान में जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी. वे लोगों को सही जानकारी देकर अफवाहों से बचा सकते हैं और पात्र लाभुकों को आवेदन प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं.

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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