पिपरा. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो बन गया, लेकिन आज तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाओं से वंचित है. स्पेशलिस्ट चिकित्सक की बात तो दूर यहां चिकित्सक भी अभी तक बहाल नहीं हो पाए हैं. 10 चिकित्सकों की जगह यहां मात्र दो एमबीबीएस चिकित्सक कार्यरत हैं. दो-तीन आयुष चिकित्सक भी कार्यरत हैं. आयुष चिकित्सकों के सहारे सीएससी पिपरा चल रहा है. सबसे बड़ी परेशानी महिला रोगियों के साथ है. यहां एक भी महिला चिकित्सक की स्थापना नहीं है. जबकि राज्य सरकार के नियम अनुसार प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक महिला चिकित्सक की पदस्थापना आवश्यक है. सरकार का ध्यान इस और नहीं है. जबकि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह के 09 तारीख को ढाई सौ से 300 महिलाओं का जांच किया जाता है. इस औसत से गर्भवती महिलाओं का डिलीवरी यहां होता रहा है. बावजूद इतनी बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं का इलाज एएनएम द्वारा किया जा रहा है. महिला चिकित्सक के नहीं रहने के कारण ही एएनएम द्वारा ही प्रसव कराया जाता है. छोटी-मोटी परेशानी में गर्भवती महिलाओं को रेफर करने की परंपरा महिला चिकित्सक की अभाव में बनी हुई है. गांव घर की गरीब महिलाएं प्रसव के लिए हायर सेंटर अथवा प्राइवेट नर्सिंग होम में जाने को विवश हैं.
मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
10 चिकित्सकों की जगह यहां मात्र दो एमबीबीएस चिकित्सक कार्यरत हैं
