बिहार पेंशनर समाज की बैठक सम्पन्न, सरकार पर पेंशनर विरोधी रवैये का लगाया आरोप

माधव प्रसाद सिंह बने राज्य निदेशक परिषद के जिला प्रतिनिधि

– लंबित मांगें पूरी नहीं होने पर 15 मार्च को पटना में बड़े आंदोलन की दी चेतावनी – माधव प्रसाद सिंह बने राज्य निदेशक परिषद के जिला प्रतिनिधि सुपौल. बिहार पेंशनर समाज जिला शाखा सुपौल की एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय बैठक कांग्रेस कार्यालय परिसर में शनिवार को आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता जिला सभापति सत्यनारायण चौधरी ने की. यह बैठक राज्य इकाई द्वारा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई थी. जिसमें पर्यवेक्षक के रूप में बिहार पेंशनर समाज के जिला सचिव सहरसा रघुनाथ प्रसाद यादव उपस्थित रहे. बैठक में सर्वसम्मति से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए जिला सचिव माधव प्रसाद सिंह को राज्य निदेशक परिषद के लिए जिला प्रतिनिधि के पद पर निर्वाचित किया गया. इसके साथ ही वे राज्य कमेटी बोर्ड के सदस्य भी होंगे. उनके चयन पर उपस्थित पेंशनरों ने हर्ष व्यक्त किया और आशा जताई कि वे पेंशनरों की समस्याओं को राज्य स्तर पर मजबूती से उठाएंगे. बैठक के दौरान केन्द्र एवं राज्य सरकार पर वर्षों से पेंशनरों की मूलभूत एवं संवैधानिक मांगों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया गया. वक्ताओं ने सरकार को घोर कर्मचारी, पदाधिकारी, वरीय नागरिक एवं पेंशनर विरोधी बताते हुए दोहरे चरित्र का आरोप भी लगाया. पेंशनर समाज के नेताओं ने कहा कि पेंशनर अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश और राज्य की सेवा में समर्पित कर देते हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है. बैठक में केन्द्र एवं राज्य सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गयी. इनमें कोरोना काल में काटी गई तीन किस्त महंगाई भत्ता का अविलंब भुगतान, मनमोहन सिंह सरकार द्वारा वरीय नागरिकों एवं पेंशनरों को रेल, बस एवं हवाई यात्रा में दी गई रियायत को तत्काल बहाल करने की मांग प्रमुख रही. पेंशनरों ने कहा कि महिलाओं को 50 प्रतिशत एवं पुरुषों को 40 प्रतिशत किराया छूट की सुविधा को पुनः लागू किया जाना चाहिए. इसके अलावा पेंशन की गणना की वर्तमान नीति पर भी कड़ा विरोध दर्ज किया गया. पेंशनरों ने 80 वर्ष की आयु पर 20 प्रतिशत पेंशन जोड़ने की नीति को गलत बताते हुए इसे समाप्त करने और हर पांच वर्ष पर पांच प्रतिशत पेंशन मूल पेंशन में जोड़ने का आदेश शीघ्र जारी करने की मांग की. आयुष्मान कार्ड को लेकर भी सरकार की नीति पर सवाल उठाए गए और वरीय नागरिकों की आयु सीमा 70 वर्ष के बजाय 60 वर्ष करने की मांग की गई. बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में कार्यरत कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को तत्काल लागू करने की मांग की गई. साथ ही विधायक और सांसदों को दी जा रही चार-चार, पांच-पांच गैर संवैधानिक पेंशन को बंद करने की भी जोरदार मांग उठी. बैठक में प्रस्ताव पारित कर केन्द्र एवं राज्य सरकार को चेतावनी दी गई कि यदि 28 फरवरी 2026 तक पेंशनरों की मूलभूत एवं संवैधानिक लंबित मांगों की पूर्ति नहीं की गई, तो 15 मार्च 2026 को गर्दनीबाग पटना स्थित गेट लाइब्रेरी हॉल में आयोजित राज्य स्तरीय आम सभा में सरकार के विरुद्ध बड़े आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा.

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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