अनदेखी. सदर थाना परिसर में हो रहे आवास निर्माण में गड़बड़ी, नहीं है किसी का ध्यान
करीब 4.50 करोड़ की लागत से सदर थाना परिसर में महिला थाना, एससी/एसटी थाना और पुलिस कर्मियों के लिए आवास का निर्माण हो रहा है. जिसमें घटिया सामग्री का प्रयोग हो रहा है. जिसके कारण भवन की मजबूती भी संदेह के दायरे में है.
सुपौल : सामान्य तौर पर जिले में कोई आपराधिक घटना हो तो सुरक्षा संबंधी सभी जिम्मेवारियां पुलिस के कंधे पर ही होती है. लेकिन पुलिस कर्मियों की जान भी आने वाले दिनों में खतरे में पड़ सकती है. क्योंकि सदर थाना परिसर में महिला थाना, एससी/एसटी थाना और पुलिस कर्मियों के लिए आवास का निर्माण हो रहा है. जो योजना करीब 4.50 करोड़ की है. लेकिन निर्माण कार्य के दौरान यहां गुणवत्ता की व्यापक पैमाने पर अनदेखी हुई है. जिसके कारण संभव है कि पुलिस कर्मियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए बना यह मकान ही उनके लिए मौत का तांडव पसार दे. दरअसल निर्माणाधीन इस भवन का कार्य लगभग संपन्न होने पर है
और शीघ्र ही पुलिस विभाग को हस्तांतरण की भी तैयारी है. लेकिन निर्माण कार्य के लिए लोकल बालू का प्रयोग हो रहा है. जिसके कारण भवन की मजबूती भी संदेह के दायरे में है. खास बात यह है कि इस काले कारनामे को छुपाने के लिए संवेदक द्वारा बालू के ऊपर सोनसेन बालू की एक परत चढ़ा दी जाती है. जिससे प्रथम दृष्टया सब कुछ सही लगता है.
वही निर्माण कार्य के लिए मसाला भवन के पिछले हिस्से में तैयार होता है. जिससे यह अधिकारियों की नजर में भी नहीं आता है. वही घटिया ईंट का प्रयोग भी निर्माण कार्य के लिए हो रहा है. इधर, थाना परिसर में मौजूद पुलिस कर्मियों की मानें तो ड्यूटी की व्यस्तता के कारण निर्माण कार्य पर ध्यान टिकाये रहना संभव नहीं होता है. ऐसे में संवेदक की मनमर्जी को भी खुली छूट मिली हुई है और थाना परिसर में ही इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया जा रहा है.
भवन के पिछले हिस्से में तैयार होता है मसाला
थाना से लेकर आवास भवन तक के लिए लगभग कार्य पूर्ण हो चुका है. वही छोटे-मोटे कार्य ही शेष रह गये हैं. हालांकि मकान के पिछले हिस्से में प्लास्टर का काम पूरी तरह अधूरा है. इसके अलावा जल निकासी के लिए नाला तथा अन्य कुछ कार्य बाकी हैं. जिसको लेकर जोर-शोर से कार्य चल रहा है. लेकिन निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों का उल्लंघन करते हुए लोकल बालू का प्रयोग हो रहा है. संवेदक आरआर कंस्ट्रक्शन के कर्मियों की मानें तो केवल संवेदक के आदेशों के अनुरूप कार्य किया जा रहा है और मानकों में भी इसी बालू का प्रयोग बताया गया है. हालांकि प्रभात खबर द्वारा जब स्थल पर पहुंच कर आशय की जानकारी प्राप्त की गयी, कुछ ही देर के बाद बालू का ढेर यहां से हटा दिया गया. खास बात यह थी कि मसाला भवन के पिछले हिस्से में तैयार किया जा रहा था. जबकि भवन के आगे भी काफी जगह शेष है. कुछ पुलिस कर्मियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि घालमेल के लिए ही मसाला भवन के पिछले हिस्से में तैयार किया जा रहा है. पूर्व में जब मार्च 2016 में भवन निर्माण का कार्य आरंभ किया गया था, मसाला भवन के अगले हिस्से में तैयार किया जा रहा था. लेकिन जैसे ही आगे का कार्य संपन्न हुआ, मसाला ऐसी जगह बनाया जाने लगा, जहां सामान्य तौर पर किसी का आना-जाना नहीं होता है. इतना ही नहीं इसी मसाले का प्रयोग थाना परिसर के चार क्वार्टरों की मरम्मत के लिए किया जा रहा है. इसके लिए बालू और सीमेंट उक्त स्थल पर ही मिला लिया जाता है. वही अधिकारियों को शक न हो, इसके लिए संबंधित क्वार्टर के आगे मसाला में पानी दिया जाता है. गौरतलब है कि बालू-सीमेंट के मिल जाने के कारण बालू की पहचान मुश्किल होती है, जिसका लाभ संवेदक उठा रहे हैं.
निर्माण कार्य में भी हो रही है देरी
निविदा के अनुसार संवेदक आरआर कंस्ट्रक्शन को दिसंबर 2016 तक महिला व एससी/एसटी थाना सहित आवास के लिए भवन का निर्माण पूरा करना था. जबकि 26 जनवरी के पूर्व ही इसे हस्तांतरण की तैयारी भी चल रही थी. बकायदा 26 जनवरी के मौके पर इस नये भवन में थाना को स्थानांतरित करने की तैयारी हो गयी थी. लेकिन कंस्ट्रक्शन कंपनी की लेटलतीफी के कारण भवन पुलिस विभाग को सुपुर्द नहीं हो सका है. हां, इस बीच संवेदक की कारगुजारी सामने आने के बाद से खुद पुलिस अधिकारी भी सकते में हैं. जाहिर है, निर्माण कार्य के जांच की मांग भी दबी जुबान ही सही पुलिस अधिकारी करने लगे हैं. ऐसे में संवेदक की परेशानी आने वाले दिनों में बढ़ती नजर आ रही है.
थाना परिसर में भवन का निर्माण हो रहा है. ऐसे में संबंधित थानाध्यक्ष को भी इस पर सख्ती बरतनी चाहिए. वे कार्रवाई के लिए भी सक्षम हैं. बावजूद मामला संज्ञान में आया है तो निश्चित तौर पर इसकी जांच करायी जायेगी. संवेदक के विरुद्ध हर संभव कार्रवाई की जायेगी.
राम नारायण पासवान, कार्यपालक अभियंता, पुलिस निगम
निर्माण कार्य संबंधी मामलों की जांच का जिम्मा पुलिस के अभियंत्रण विभाग का है. विभिन्न कार्यों में व्यस्तता के कारण हर कार्य पर नजर रखना संभव नहीं है. हालांकि कई बार संवेदक की गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर उसे निर्देशित भी किया गया है. लेकिन कोई खास सुधार नहीं हुआ है.
राजेश्वर सिंह, सदर थानाध्यक्ष, सुपौल
