रोशन रसिक
राघोपुर : बात विवाह की हो तो सामान्य तौर पर लोग लड़के-लड़की का चेहरा, उसकी हैसियत और दहेज में मिलने वाले रुपये का ही जिक्र करते हैं. वही इसमें भी सामाजिक संरचना कुछ ऐसी है कि शादी के लिए हां या न कहने का फैसला या तो अभिभावकों का होता या फिर दुल्हा बनने वाले शख्स का. लेकिन शादी के लिए लड़कियां शर्त रख दे और उसे स्वीकार भी कर लिया जाये, तो चर्चा लाजिमी है. ऐसा ही एक मामला प्रखंड क्षेत्र के चंपानगर पंचायत का सामने आया है
जब शादी के पूर्व शौचालय निर्माण की शर्त किसी और ने नहीं बल्कि दुल्हन बनने वाली अंजली ने ही रख दिया. पहले तो जब लड़की ने शर्त रखी, खुद मायके वाले ही नाराजगी जताने लगे. लेकिन उसने न केवल अपने मायके वालों को मनाया, बल्कि उस पक्ष के लोग भी इस शर्त पर तैयार हो गये जो अगले सप्ताह ही उसके ससुराल के हो जायेंगे. दरअसल चंपानगर पंचायत निवासी उपेंद्र ठाकुर के पुत्र रामबली ठाकुर का विवाह अररिया जिला निवासी शंभू ठाकुर की पुत्री अंजली से तय हुआ है. दोनों पक्ष से लड़का-लड़की को पसंद करने के बाद तिलक की रश्म भी पूरी हो चुकी थी. जिसके बाद विवाह की तिथि को लेकर मंथन शुरू हो गया. लेकिन इस क्रम में लड़की को इस बात का पता चला कि भविष्य में जो घर उसका ससुराल बनेगा, वहां शौचालय नहीं है. फिर क्या था, लड़की ने जिद ठान दी कि शादी तभी होगी, जब घर में शौचालय का निर्माण होगा.
हालांकि लड़की की इस जिद को उसके ससुराल वालों ने भी सकारात्मक सोच के रूप में लिया और शौचालय का निर्माण करा लिया गया है.
10 मार्च को होगा विवाह : रामबली और अंजली की शादी से जुड़ी रश्में यूं तो चार माह पूर्व से ही आरंभ हो चुकी थी. लेकिन दोनों परिवारों की सहमति से विवाह की तिथि फरवरी माह में तय की गयी. इस बीच जब अंजली ने शौचालय की शर्त रखी तो दोनों परिवार पहले ऊहापोह की स्थिति में आ गये. शौचालय निर्माण का कार्य पूरा होने के बाद ही दोनों पक्षों की सहमति से अब शादी की तिथि 10 मार्च मुकर्रर की गयी है.
ससुर ने कहा, लक्ष्मी लेकर आयेगी बहू
हिंदू संस्कृति में बहू और बेटियों को लक्ष्मी का स्वरूप कहाजाता है. यही कारण है कि जब शौचालय निर्माण के इस मुद्दे पर भी अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए अंजली ने अपने ससुराल वालों को शौचालय निर्माण के लिए राजी कर लिया, पूरा परिवार खुशी से गदगद है.
ससुर शंभू ठाकुर व दूल्हे के मामा जगदीश ठाकुर ऋषिकांत ने कहा जिस प्रकार बहू ने ससुराल आगमन के पूर्व ही बुद्धि और साहस का परिचय दिया है, निश्चित तौर पर ससुराल आने पर वह अपने साथ लक्ष्मी लेकर आयेगी. इधर, विवाह के इस अनोखे शर्त को लेकर प्रखंड क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं. लोग कहते हैं कि अगर ऐसी ही बेटी हर घर में पैदा ले तो शौचालय निर्माण के लिए सरकार को 12 हजार रुपये का अनुदान देने की भी आवश्यकता नहीं होगी.
