नाबालिग छात्रा को मिला इंदिरा आवास

सुपौल : जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत देवीपुर पंचायत में एक नाबालिग छात्रा के नाम आवास योजना स्वीकृत हुई और उसका प्रथम किस्त भुगतान भी कर दिया गया. लेकिन जब एक नोटिस के बाद छात्रा के भाई ने मामले की शिकायत की तो बकायदा जांच करा कर बीडीओ द्वारा थाना में पंचायत सचिव व छात्रा […]

सुपौल : जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत देवीपुर पंचायत में एक नाबालिग छात्रा के नाम आवास योजना स्वीकृत हुई और उसका प्रथम किस्त भुगतान भी कर दिया गया. लेकिन जब एक नोटिस के बाद छात्रा के भाई ने मामले की शिकायत की तो बकायदा जांच करा कर बीडीओ द्वारा थाना में पंचायत सचिव व छात्रा के पति के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करा दी गयी.इंदिरा आवास योजना (वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास योजना) यानी भूमिहीन अथवा गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वाले लोगों के लिये सिर पर छत मुहैया कराने का माध्यम.

योजना लाभ के लिए यूं तो शादीशुदा होना अनिवार्य है. इसके लिए बकायदा आवेदन भी प्राप्त किया जाता है और विभिन्न स्तरों पर आवेदन के तथ्यों का भौतिक सत्यापन भी कराना प्रशासन की अनिवार्यता है. लेकिन जब शासन ही अपने दायित्वों से पीछे भाग जाये, तो क्या कीजियेगा. सवाल इसलिए कि जिले के राघोपुर प्रखंड अंतर्गत देवीपुर पंचायत में एक नाबालिग छात्रा के नाम आवास योजना स्वीकृत हुई और उसका प्रथम किस्त भुगतान भी कर दिया गया.
लेकिन जब एक नोटिस के बाद छात्रा के भाई ने मामले की शिकायत की तो बकायदा जांच करा कर बीडीओ द्वारा थाना में पंचायत सचिव व छात्रा के पति के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करा दी गयी. खास बात यह थी कि दस्तावेजों में छात्रा के भाई को ही उसका पति करार दे दिया गया था और बैंक पासबुक पर एक शादीशुदा महिला की तसवीर लगा कर राशि का उठाव किया गया. यह सब कुछ बिचौलियों के माध्यम से किया गया.

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