प्रधान की मनमर्जी से चलता है प्रा िवद्यालय

समस्या . िवद्यालय में बच्चों की उपस्थिति कम मधेपुरा जिला सीमा से सटे प्राथमिक विद्यालय कजहा में सामान्य तौर पर विद्यालय संचालन के मामले में प्रधानाध्यापिका सुशीला कुमारी अपनी ही मनमर्जी चलती है. लौकहा : पंचायत अंतर्गत मधेपुरा जिला सीमा से सटे प्राथमिक विद्यालय कजहा में सामान्य तौर पर अधिकारियों को आना-जाना न के बराबर […]

समस्या . िवद्यालय में बच्चों की उपस्थिति कम

मधेपुरा जिला सीमा से सटे प्राथमिक विद्यालय कजहा में सामान्य तौर पर विद्यालय संचालन के मामले में प्रधानाध्यापिका सुशीला कुमारी अपनी ही मनमर्जी चलती है.
लौकहा : पंचायत अंतर्गत मधेपुरा जिला सीमा से सटे प्राथमिक विद्यालय कजहा में सामान्य तौर पर अधिकारियों को आना-जाना न के बराबर होता है. वही यहां विद्यालय संचालन के मामले में प्रधानाध्यापिका सुशीला कुमारी अपनी ही मनमर्जी चलती है.
अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विद्यालय प्रधान को न तो इस बात की जानकारी होती है कि विद्यालय में कितने छात्र-छात्रा नामांकित हैं और न ही उनकी उपस्थिति का पता होता है. दीगर बात है कि पंजी पर प्रतिदिन 60 फीसदी बच्चों की उपस्थिति दर्ज करा दी जाती है. दरअसल विद्यालय में कक्षा 01 से 05 तक कुल 233 बच्चे नामांकित हैं. लेकिन अधिकतर बच्चे विद्यालय की लचर व्यवस्था के कारण विद्यालय आते ही नहीं हैं. गुरुवार को दिन के करीब 12 बजे विद्यालय में एमडीएम का भोजन तैयार हो रहा था. रसोइया शकल देव पाल की जगह उनकी पत्नी लालो देवी बच्चों के लिए भोजन तैयार कर रही थी,
जो विद्यालय शिक्षा समिति की सचिव भी है. उनसे जब यह पूछ गया कि कितने बच्चों का भोजन तैयार हो रहा है. उन्होंने बताया 130 बच्चों के लिए चावल बनाया जा रहा है. इस बीच प्रधान सुशीला कुमारी भी अपना काम छोड़ किचन शेड पहुंची. उन्होंने बताया कि 100 बच्चों के लिए ही भोजन तैयार हो रहा है. रसोइया ने फिर बताया कि आज चावल और आलू-कद्दू की सब्जी बनाने का आदेश प्रधान द्वारा किया गया है. हालांकि यह मीनू में शामिल नहीं था. विद्यालय प्रधान से जब बच्चों की उपस्थिति की जानकारी मांगी गयी. उन्होंने बताया 37 बच्चे ही विद्यालय में उपस्थित हैं. ऐसे में सवाल लाजिमी था कि आखिर 37 बच्चों की उपस्थिति में 100 या 130 बच्चों का भोजन क्यों तैयार हो रहा है. तो प्रधान का जवाब आया कि भोजन तो महज 35 का ही तैयार हो रहा है.
यहां दिलचस्प यह था कि विद्यालय की उपस्थिति पंजी पर कुल 117 बच्चों को उपस्थित बताया गया था. खैर, इस बीच अभिभावकों की भी भीड़ मौके पर जुटी तो सभी विद्यालय प्रधान की मनमर्जी बयां करने लगे. ग्रामीणों ने पठन-पाठन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए व्यवस्था पर कई गंभीर आरोप लगाये. ग्रामीणों ने वरीय अधिकारियों से मामले की जांच कर दोषी पर कार्रवाई की मांग की.

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