लापरवाही. पेशी के दौरान न्यायालय से फरार अपरािधयों का सुराग नहीं
भागने के दौरान पकड़ाये अपराधी पमपम सिंह ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया है कि कुख्यात मनीष यादव पिछले डेढ़ महने से भागने की योजना बना रहा था.
सुपौल : व्यवहार न्यायालय से पेशी के दौरान गुरुवार को हथकड़ी से हाथ निकाल कर फरार हुए दो कुख्यात पराधी मनीष यादव और गजेंद्र पंडित की गिरफ्तारी 40 घंटा बीत जाने के बावजूद संभव नहीं हो पायी है. सुपौल पुलिस की निष्क्रियता कहें या कमजोर सूचना तंत्र का खामियाजा गुरुवार की दोपहर से ही कोसी प्रमंडल के कई थाना क्षेत्रों के गलियों की खाख छानने के बावजूद पुलिस टीम का हाथ खाली है.
अब पुलिस अंदेशा जाहिर कर रही है कि दोनों भागे हुए अपराधी पटना या पड़ोसी देश नेपाल में जा कर छिपे हुए हैं. वहीं दूसरी तरफ भागने के दौरान पकड़ाये अपराधी पमपम सिंह ने पुलिसिया पूछताछ के दौरान खुलासा किया है कि कुख्यात मनीष यादव पिछले डेढ़ महने पूर्व से भागने की योजना बना रहा था.
मनीष ने अपनी योजना के बारे में जेल में बंद अपने साथियों से भी चर्चा की थी. पमपम ने बताया है कि गजेंद्र पंडित मनीष के हरेक राज का राजदार था. बहरहाल पुलिस फरार हुए दोनों कुख्यात को गिरफ्तार करने के प्रयास में जुटी है.इस मामले में कोर्ट हाजत प्रभारी सहायक अवर निरीक्षक शैलेंद्र कुमार के आवेदन पर सदर थाना में कांड संख्या 261/16 दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है. दर्ज प्राथमिकी में कोर्ट हाजत प्रभारी द्वारा सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों की संलिप्तता की जांच की भी बात कही गयी है.
जेल में संचालित है दो दर्जन से अधिक मोबाइल
अपराधी पमपम ने पुलिस के समक्ष जेल में नियम और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए दो दर्जन से अधिक मोबाइल के संचालित होने की बात बतायी है.अपराधी ने बताया है कि बैंक लूट, हत्या, अपहरण जैसे संगीन अपराधों में शामिल कई कुख्यात मंडल कारा के अंदर समानांतर सरकार चला रहे हैं.इनके द्वारा एक से बढ़ कर एक एंड्र्वाइड मोबाइल का इस्तेमाल खुलेआम किया जा रहा है.जेल में बंद कैदी अनंत शर्मा, कृष्णा मुखिया, जेपी यादव, भीसी यादव, बालक भगत, सुखराम मेहता, मो अब्बास, मो शमीम, राम सिंह, हरि साह, दिलीप मुखिया, चंदन यादव, राजू राय, बौआ राय, पंचलाल दास जैसे कुख्यात अपराधी मोबाइल रख कर अपने आकाओं के संपर्क में हैं तथा यहीं से अपने गुर्गों को भी दिशा निर्देश देते रहते हैं.
एसपी ने उठाया सख्त कदम कई पुलिस कर्मी िनलंबित
न्यायालय से पेशी के बाद फरार दो कुख्यात कैदी के मामले में सुपौल एसपी डॉ कुमार एकले ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इसके लिए जिम्मेवार एक पुलिस पदाधिकारी एवं दो पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है. वहीं न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए एसपी ने शुक्रवार से न्यायालय में तैनात सभी पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर करते हुए नये जवानों को कोर्ट के सुरक्षा की जिम्मेवारी सौंपा है.
पुलिस अधीक्षक डॉ एकले ने बताया कि न्यायालय की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बरदास्त नहीं किया जायेगा.तत्काल कैदी भागने के मामले में सहायक अवर निरीक्षक मदन पौद्दार, हवलदार बद्री नारायण मंडल और डीपीसी गार्ड महात्मा सिंह को निलंबित किया गया है.एसपी के नये निर्देश के बाद शुक्रवार को न्यायालय परिसर का माहौल बदला-बदला सा नजर आ रहा था. पुलिस कर्मी अपने कर्तव्य पर मुस्तैदी के साथ उपस्थित थे.न्यायालय के मुख्य द्वार पर शुक्रवार को सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नजर आ रहा था.
गुरुवार को न्यायालय में पेशी के बाद भागने के दौरान धराये अपराधी पमपम सिंह के सनसनीखेज खुलासे के बाद मंडल कारा में कायम रामराज की स्थिति से अवगत होने के बाद पुलिस प्रशासन के होश उड़ गये हैं.पमपम ने पुलिस के समक्ष खुलासा किया है कि मंडल कारा के अंदर बंदियों की मनमानी के सामने जेल प्रशासन ने धुटने टेक दिये हैं. जेल प्रशासन के लुंज-पुंज व्यवस्था का फायदा उठा कर कई कुख्यात अपराधी मंडल कारा में समानांतर सरकार कायम किये हुए हैं. पेशी के बाद फरार हुए कुख्यात मनीष यादव जेल में खुलेआम एंड्र्वाइड मोबाइल इस्तेमाल कर रहा था.
मनीष मोबाइल के जरिये कई अपराधी सरगना के संपर्क में था. वहीं जेल के अंदर करीब दो दर्जन से अधिक मोबाइल कार्यरत रहने की बात भी पमपम ने पुलिस को बतायी है.अपराधी जेल के अंदर चल रहे नशा के कारोबार का भी पर्दाफाश किया है. पमपम के इस खुलासे के बाद जहां मंडल कारा की हकीकत लोगों के सामने है. वहीं जेल प्रशासन की भी कलई खुल कर सामने आ गयी है.
पटना या नेपाल में छिपे हैं दोनों अपराधी
गुरुवार को अपराधियों के फरार होने के तुरंत बाद एसपी डॉ कुमार एकले ने सदर एसडीपीओ वीणा कुमारी के नेतृत्व में टीम गठित किया है.जिसमें सदर इंस्पेक्टर इंद्रजीत बैठा, सदर थानाध्यक्ष राम इकबाल यादव, किसनपुर थानाध्यक्ष चंदन कुमार, अवर निरीक्षक पंकज कुमार, चंद्रकांत गौरी, साइबर क्राइम एक्सपर्ट रणविजय सिंह और विवेक कुमार आदि को शामिल कर अपराधियों की गिरफ्तारी हेतु कई दिशा निर्देश दिया. सहरसा एवं मधेपुरा पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर पुलिस टीम गुरुवार की रात से ही कई थाना क्षेत्रों में ताबड़तोड़ छापेमारी करती रही लेकिन जेल से भागे अपराधियों का कोई सुराग नहीं मिला.
थक हार कर पुलिस टीम अब मान रही है कि दोनों कुख्यात अपराधी या तो पटना या फिर पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के सीमावर्ती इलाका स्थित सुरक्षित जगह पर पनाह लिये हुए है. हालांकि पुलिस टीम द्वारा पटना में भी छापेमारी करने की रणनीति बनायी जा रही है लेकिन सामने चुनाव रहने के कारण पुलिस टीम को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
ज्ञात हो कि मनीष यादव पटना स्थित एक लॉज में रह कर पहले पढ़ाई करता था. पटना में रहने के दौरान ही मनीष अपराध की दुनियां में प्रवेश किया था. जिस कारण पुलिस टीम पटना को विशेष रूप से ध्यान में रख कर कार्रवाई कर रही है.
