परेशानी. वार्ड एक के निवासियों को माॅनसून के आगमन से पहले सता रही चिंता
कोशी तटबंध के भीतर से विस्थापित हुए लोग वार्ड संख्या एक में उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं. इस वार्ड की सड़कें दीया तले अंधेरा की कहावत को चरितार्थ कर रही है.
सुपौल : विकास के इस दौर में नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत जिला मुख्यालय की अधिकांश सड़कें चकाचक हो चुकी है. कई ऐसी सड़कें भी हैं, जिसके निर्माण से लेकर इसकी मरम्मती में करोड़ों रुपये खर्च किये जा चुके हैं. वहीं दूसरी ओर शहर में कई ऐसी सड़कें भी है जो आज भी जर्जर हैं. दीया तले अंधेरा वाली कहावत को चरितार्थ कर रही ये सड़कें उद्धारक की बाट जोह रही है. ऐसी ही एक सड़क नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत वार्ड नंबर एक में मौजूद है.
यह ब्रह्म स्थान के समीप से निकल कर मलहद रोड में मिलती है. उक्त सड़क की न तो अब तक सोलिंग हुई है न ही पक्कीकरण नहीं किया गया है. इसके कारण मुहल्ले में रहने वाले लोगों को आवागमन में परेशानी होती है. बारिश होने पर कीचड़ से होकर आवागमन करना पड़ता है. सड़क पर दो से तीन फीट तक पानी भी जमा हो जाता है.
उपेक्षा का दंश झेल रहे कोसी के विस्थापित
गौरतलब है कि वार्ड नंबर एक के इस मुहल्ले में अधिकतर कोसी विस्थापितों का आशियाना है. कोसी तटबंध के निर्माण के दौरान तटबंध के भीतर बसे लोगों द्वारा विरोध जताने के बाद स्थानीय बैरिया मंच पर देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने लोगों से कई वायदे किये थे. इनमें एक यह भी था कि तटबंध के भीतर बसे लोगों को तटबंध के बाहरी क्षेत्र में पुनर्वासित किया जायेगा, जहां उनके लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी. राष्ट्रपति के आश्वासन के बाद कुछ पंचायत के लोगों को पुनर्वासित भी किया गया, लेकिन दुर्भाग्य है कि पुनर्वासित हुए इन लोगों को अब तक अपेक्षित व बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करायी गयी है.
