अनदेखी. समस्या ही समस्या, कैसे योजनाओं को पहनायें अमलीजामा
सदर अस्पताल में कई महत्वपूर्ण जीवन रक्षक दवाओं के नहीं रहने के कारण मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. अस्पताल के कर्मी बताते हैं कि विगत एक माह से अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष और प्रसव कक्ष में कई महत्वपूर्ण दवा उपलब्ध नहीं है. इमरजेंसी और प्रसव कक्ष में दवाओं के नहीं रहने के कारण मरीज के परिजनों को बाजार से दवा खरीद कर लाना पड़ता है.
सुपौल : सदर अस्पताल सुपौल में इन दिनों दवाओं का घोर अभाव है. कई महत्वपूर्ण जीवन रक्षक दवाओं के नहीं रहने के कारण मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं गरीब और निम्न तबके के मरीज आर्थिक अभाव के कारण कर्ज लेकर दवा की खरीदारी कर इलाज के लिए मजबूर हो रहे हैं. अस्पताल के कर्मी बताते हैं कि विगत एक माह से अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष और प्रसव कक्ष में कई महत्वपूर्ण दवा उपलब्ध नहीं है. इमरजेंसी और प्रसव कक्ष में दवाओं के नहीं रहने के कारण मरीज के परिजनों को बाजार से दवा खरीद कर लाना पड़ता है.
वहीं दूसरी तरफ विडंबना ही कहा जाय कि अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ एन के चौधरी को पता ही नहीं है कि अस्पताल में दवाओं का अभाव है. बुधवार को जब प्रभात खबर के संवाददाता ने उपाधीक्षक को जानकारी दी तो उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें दवा खत्म होने की जानकारी नहीं हैं.
एंटी बायोटिक के सहारे चल रही इमरजेंसी सेवा : बुधवार को अस्पताल के पड़ताल के दौरान कर्मियों ने बताया कि इमरजेंसी कक्ष में विगत एक माह से गैस की सूई रेनीटेडिन, दर्द का इंजेक्सन डैक्लोनोफेनिक, खून रोकने का महत्वपूर्ण इंजेक्शन रिभीसी या क्लॉट सहित अन्य कई महत्वपूर्ण इंजेक्शन जैसे उल्टी रोकने के लिए, दस्त रोकने के लिए, चक्कर रोकने की दवा अस्पताल के इमरजेंसी कक्ष में उपलब्ध नहीं हैं. एक मात्र एंटीवायोटिक जेंटामाइसिन और रुई पट्टी के भरोसे जिला का सबसे महत्वपूर्ण अस्पताल रोगियों को सेवा उपलब्ध करवा रहा है.
डायरिया के मरीजों को भी परेशानी : मौसम के बदलाव के कारण जिले भर में डायरिया का प्रकोप की निरंतर बढ़ोतरी हो रही है. सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ विनय कुमार बताते हैं कि प्रतिदिन डायरिया से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं. वहीं दवाओं की अनुपलब्धता के कारण डायरिया के मरीज परेशान हो रहे हैं. खास कर मैटॉन इंजेक्शन और गैस या उल्टी रोकने की दवा नहीं रहने के कारण मरीजों को दवा के लिए बाजार के सहारे निर्भर होना पड़ता है.
स्वास्थ्य योजनाओं का बेड़ा गर्क :
सदर अस्पताल में दवाओं की कमी रहने के कारण सरकार द्वारा संचालित कई योजनाएं दम तोड़ रही है, परिवार नियोजन, संस्थागत प्रसव, मुफ्त चिकित्सा सुविधा, जननी बाल सुरक्षा योजना का बेड़ा गर्क हो चुका है. सोमवार को सदर प्रखंड के एक गांव से परिवार नियोजन करवाने पहुंची तकरीबन दर्जन भर महिलाओं का पंजीयन कराये जाने के बाद दवा उपलब्ध नहीं रहने के कारण वापस लौटना पड़ा. उक्त सभी महिलाओं के परिजनों द्वारा परिवार नियोजन कराने आयी महिलाओं को ऑपरेशन थियेटर भेजा गया. जहां डायजीपाम इंजेक्शन नहीं रहने के कारण परिवार नियोजन का कार्य नहीं कराया जा सका.
दवा खरीदारी में शिथिलता बरत रहा प्रबंधन : सदर अस्पताल के उपाधीक्षक को इमरजेंसी कक्ष के दवा की खरीदारी का अधिकार प्राप्त है. लेकिन अपने ही विभाग से सहमे उपाधीक्षक दवा की खरीदारी के प्रति संवेदनशील नहीं हैं. जिसके कारण एक ओर जहां गरीब मरीज दवा के अभाव में परेशान है तो दूसरी तरफ समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा दम तोड़ती नजर आ रही है.
दवाओं की कमी से जूझ रहा प्रसव कक्ष
सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में भी दवाओं का घोर अभाव देखा जा रहा है. प्रसव कार्य में सबसे महत्वपूर्ण इंजेक्शन ऑक्सोयेक्सीन महीनों से उपलब्ध नहीं है. प्रसव के उपरांत शिशु को लगाने के लिए एंटीबायोटिक भी परिजन बाजार से खरीदारी कर लाते हैं. प्रसव कक्ष में भी खून रोकने व उल्टी रोकने का इंजेक्शन नहीं है. प्रसव कक्ष में दवा नहीं रहने के कारण प्रसूता के परिजनों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है. यहां यह बता दें कि सरकार द्वारा प्रसव के मरीजों को जच्चा बच्चा को प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराया जाता है. लेकिन अस्पताल में दवाओं की कमी रहने के कारण प्रसूता को दिये जा रहे प्रोत्साहन राशि से कहीं अधिक खर्च करने की विवशता बनी रहती है.
इस बाबत पूछने पर अस्पताल उपाधीक्षक एन के चौधरी ने बताया कि जिला भंडार गृह द्वारा दवा की आपूर्ति की जाती है. कहा कि हमें भी इमरजेंसी सेवा का दवा खरीदने का अधिकार प्राप्त है. भंडारगृह में दवा अनुपलब्ध रहने के कारण मरीजों को दवा नहीं दी जा रही है.
