कार्य के लिए भटकते हैं उपभोक्ता प्रधान डाकघर की कार्यप्रणाली के विरोध में अभिकर्ताओं का धरना

सुपौल : जिला मुख्यालय स्थित संचालित डाकघर की स्थिति अजीबोगरीब है. मालूम हो कि बीते ढाई दशक पूर्व सुपौल को जिला का दर्जा प्राप्त हुआ. जिला बनने के पश्चात डाक शाखा को सुदृढ किये जाने का प्रयास किया गया. लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद 28 दिसंबर 2015 को प्रधान डाकघर का दर्जा प्राप्त […]

सुपौल : जिला मुख्यालय स्थित संचालित डाकघर की स्थिति अजीबोगरीब है. मालूम हो कि बीते ढाई दशक पूर्व सुपौल को जिला का दर्जा प्राप्त हुआ. जिला बनने के पश्चात डाक शाखा को सुदृढ किये जाने का प्रयास किया गया. लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद 28 दिसंबर 2015 को प्रधान डाकघर का दर्जा प्राप्त हुआ. जिले वासियों में आस जगी कि अब पोस्ट ऑफिस संबंधित सभी कार्यों के लिए लोगों को अन्यत्र नहीं भटकना पड़ेगा.

प्रधान डाकघर से ही सरकारी योजनाओं के कार्यों का निबटारा कराया जायेगा. लेकिन कर्मियों सहित समुचित संसाधनों से जूझ रहे व प्रधान डाकघर की व्यवस्था से तंग आकर सोमवार को राष्ट्रीय बचत अभिकर्ता संघ सुपौल इकाई द्वारा डाकघर के मुख्य द्वार के समीप एक दिवसीय धरना का आयोजन किया गया. धरना में शामिल अभिकर्ताओं का कहना था कि इस डाकघर को प्रधान डाकघर का दर्जा दिये जाने के साथ – साथ सीबीएस सेवा से भी जोड़ दिया गया. लेकिन क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा डाकघर के समुचित संचालन को लेकर समुचित संसाधन उपलब्ध नहीं कराया गया. जिस कारण बचत अभिकर्ता संघ के इकाई 16 सूत्री मांगों को लेकर एक दिवसीय धरना पर बैठे हैं.

नाराज अभिकर्ताओं ने व्यवस्था पर उठाया सवाल : घरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मार्च को क्लोजिंग माह माना जाता है. लेकिन ग्राहकों को प्रधान डाकघर से एनएससी उपलब्ध नहीं हो रहा है. साथ ही विभाग द्वारा समुचित रूप से कर्मियों को प्रशिक्षित कराने का कार्य नहीं किया गया है.
कर्मियों को कंप्यूटर का ज्ञान नहीं रहने के कारण कार्यों में परेशानी हो रही है. वक्ताओं ने कहा कि एक जानकार कर्मी इस डाकघर में पदस्थापित थे. क्षेत्रीय प्रबंधन यह जानते हुए कि डाकघर को कोर बैंकिंग सेवा से जोड़ा गया है. बावजूद इसके उक्त कर्मी को अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया. ताकि प्रधान डाकघर का कार्य समुचित तरीके से ना हो पाये. कहा कि प्रधान डाकघर में 60 से अधिक कर्मियों का पदस्थापन होना चाहिए. जहां अधिकांश कर्मियों को समुचित कंप्यूटर की जानकारी नहीं हैं. अभिकर्ता संघ की मुख्य मांगों में कहा गया है कि राष्ट्रीय बचत अभिकर्ता के द्वारा की जा रही निवेश तीन माह से अनियमित चल रहा है. इसके अलावा एनएससी, केवीपी, सीबीएस का कार्य अब तक नहीं हो रहा है.
आरोप है कि डाकघर के कर्मी नहीं चाहते कि यहां कोई निवेश हो. डाककर्मी या अधिकारी अभिकर्ता का कोई कार्य नहीं करना चाहते. अभिकर्ताओं का यह भी ओराप है कि बिना सुविधा शुल्क का कोई कार्य नहीं होता, सुविधा शुल्क नहीं देने पर बेवजह परेशान किया जाता है.
जमा होने के बाद डाक कर्मी ना तो पासबुक पर मुहर लगाना चाहते हैं और ना ही हस्ताक्षर. इस कारण अभिकर्ताओं में संदेह की स्थिति बनी रहती है.
कि निवेश की गयी राशि सही तरीके से संबंधित खाते में जमा हुआ या नहीं,
– अभिकर्ताओं द्वारा खाताधारियों के जमा निकासी एवं नया खाता खुलने का समय सीमा निर्धारित किया जाय ताकि जमा होने के बाद निवेशक को सही समय पर पासबुक सहित अन्य जानकारी दी जा सके.
– अधिकांश अभिकर्ताओं को आइडी नंबर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा. जिस कारण निवेश कार्य बाधित है.
– जमा पासबुक व कंप्यूटर में जमा राशि के अंतर के सुधार हेतु कोई समुचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण अविश्वास की स्थिति बनी रहती है. इसका स्थायी निदान हो,
– महिला प्रधान अभिकर्ताओं के द्वारा खोले गये खाते को उनके कोड में नहीं डाला गया है, जिस कारण खाता बंद होने के कगार पर है.
– महिला अभिकर्ताओं के आवर्ती व्यवसाय में नये खाता नहीं खोला जा रहा है. जिस कारण व्यवसाय में हानि हो रही है.,
– अवधि पूर्ण आवर्ति जमा खाते का भुगतान सही समय पर नहीं हो रहा है ना ही खाता का संचालन हो पा रहा है, साथ ही चेक निर्गत का कार्य भी बाधित है,
– डाकघर में व्याप्त कुव्यवस्था का सारा श्रेय डाक कर्मियों के द्वारा प्रधानमंत्री व संचार मंत्री पर फेंका जा रहा है,
– डाकघर में व्याप्त कुव्यवस्था एवं भ्रष्ट्राचार में लिप्त कर्मचारियों पर कानूनी कार्रवाई करने तथा
– विगत पांच वर्षों से टीडीएस की काटी गयी राशि अभिकर्ताओं को भुगतान नियमित रूप से किये जाने शामिल हैं.

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