सुपौल : कानून की निगाह में सभी बराबर हैं चाहे वह आम हो अथवा खास. लेकिन सुपौल जिले में कानून आम और खास के लिए अलग-अलग तरीकों से काम कर रही है. अपर समाहर्ता, आपदा कुमार अरुण प्रकाश के विरुद्ध न्यायालय से जारी गिरफ्तारी का वारंट मामले में भी यही कहा जा सकता है.
जमानतीय धारा के तहत किसी आम व्यक्ति के विरुद्ध वारंट निर्गत होने के बाद संबंधित थाने की पुलिस स्वत: सक्रिय हो जाती है और उक्त वारंटी को गिरफ्तार करने के बाद ही दम लेती है. लेकिन एडीएम आपदा श्री प्रकाश को खास होने का ही फायदा मिल रहा है कि उनकी गिरफ्तारी तो दूर वे आज भी जिले में वरीयतम अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं. इतना ही नहीं श्री प्रकाश को पंचायत चुनाव के लिए आरा जिले में ऑब्जरवर का दायित्व सौंपा गया है. वहीं श्री प्रकाश के ऊपर जिले में हाल के दिनों में हुए कई भ्रष्टाचार के मामलों के जांच की भी जिम्मेवारी है.सवाल उठना लाजिमी है कि जिला प्रशासन द्वारा किस प्रकार उन्हें महत्वपूर्ण जवाबदेही दी गयी है.
छह माह पूर्व जारी हुआ था गिरफ्तारी का वारंट न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी वीरपुर रंजय कुमार की अदालत द्वारा करीब छह माह पूर्व 03 अक्तूबर 2015 को ही एडीएम आपदा श्री प्रकाश के विरुद्ध गैर जमानतीय वारंट जारी किया गया.प्रतापगंज प्रखंड के भवानीपुर दक्षिण पंचायत निवासी विनेश पूर्वे की ओर से न्यायालय में दायर वाद संख्या 299सी/14 के एक अन्य आरोपी उमेश कुमार की पूर्व में ही गिरफ्तारी हो चुकी है. अभी वर्तमान में वे जमानत पर हैं.
सवाल उठता है कि इतनी लंबी अवधि के बाद एडीएम आपदा श्री प्रकाश की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो पायी.जाहिर है कि उनकी गिरफ्तारी में उनकी हैसियत ही आड़े आयी होगी.
