चुगला के दहन के साथ ही समाप्त हुआ सामा-चकेवा फोटो-01कैप्सन- चुगला का दहन करती महिलाएं.प्रतिनिधि सुपौल भाई-बहन के स्नेहिल प्रेम का प्रतीक सामा-चकेवा पर्व बुधवार की रात्रि चुगला के दहन के साथ ही समाप्त हो गया. कृष्ण की पुत्री सामा व पुत्र सामे, दोनों भाई-बहन की लीला पर आधारित यह लोक त्योहार मिथिलांचल में महिलाओं द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व को लेकर महिलाएं हिंदी तिथि के अनुसार कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी से पूर्णिमा तक मनाती है. जिसमें महिलाओं द्वारा रात्रि में सामा-चकेवा के गीतों को गा कर उसे याद करती है. त्योहार को लेकर बीते एक सप्ताह पूर्व से ही महिलाओं द्वारा सामा-चकेवा, चिड़ैया, हाथी, ढ़ोलबज्जा, वृंदावन, सतभैया, चुगला व आदि मिट्टी की प्रतिमा बनाया गया था. जिसे पूर्णिमा की रात्रि को सामा-चकेवा के गीत की प्रस्तुति के साथ महिलाओं ने टोली बना कर खेत, खलिहान, सरोवर सहित अन्य स्थानों पर ले जाया गया. साथ ही विधान पूर्वक सामा चकेवा सहित अन्य पुतले को नये अनाज खिला कर उत्साह के साथ त्योहार का समापन किया गया. वैसे तो सभी प्रतिमाओं का इस त्योहार में अपना अलग – अलग स्थान रहा है. लेकिन सामा चकेवा के त्योहार में बच्चों के बीच आकर्षण का केंद्र चुगला के दहन रहा. इसका कारण है कि जहां सामा चकेवा के विदाई के समय महिलाओं में उदासीनता की स्थिति बनी रहती है. वहीं चुगला दहन के दौरान महिलाएं खुशी के साथ हंसती हुई गीत की प्रस्तुति देती है. जिससे बच्चों में खासा उत्साह का माहौल बना रहता है. त्योहार की रात्रि महिलाओं ने शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न स्थानों पर टोली बना कर जाती दिखी. महिलाओं द्वारा उमंग व उत्साह सहित विधि-विधान के अनुसार सामा-चकेवा के त्योहार को मनाया गया.
चुगला के दहन के साथ ही समाप्त हुआ सामा-चकेवा
चुगला के दहन के साथ ही समाप्त हुआ सामा-चकेवा फोटो-01कैप्सन- चुगला का दहन करती महिलाएं.प्रतिनिधि सुपौल भाई-बहन के स्नेहिल प्रेम का प्रतीक सामा-चकेवा पर्व बुधवार की रात्रि चुगला के दहन के साथ ही समाप्त हो गया. कृष्ण की पुत्री सामा व पुत्र सामे, दोनों भाई-बहन की लीला पर आधारित यह लोक त्योहार मिथिलांचल में महिलाओं […]
