भीमनगर : देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा को लेकर सीमावर्ती क्षेत्र के भीमनगर, कटैया पावर हाउस, कोसी बराज समेत अन्य क्षेत्रों में तैयारी पूरी कर ली गयी है. भगवान विश्वकर्मा के पूजन को लेकर क्षेत्र के लोगो मे काफी उत्साह देखा जा रहा है. हो भी क्यो न क्षेत्र में इस पूजा का अपना अलग महत्व है.
जानकार बताते हैं कि कोसी बराज के निर्माण के बाद कोसी बराज पर और कटैया पवार हाउस की स्थापना जब 70 के दशक में हुई तो उसी समय से वीरपुर, भीमनगर, कोसी बराज और कटैया पवार हाउस की विश्वकर्मा पूजा के रूप में अपनी अलग पहचान होने लगी. आसपास के जिले मधेपुरा, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, किशनगंज समेत नेपाल के सुनसरी, सप्तरी व मोरंग जिले के हजारों की संख्या में लोग विश्वकर्मा पूजा को देखने के लिए यहां आते थे.
शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि वास्तुकला के आचार्य भगवान विश्वकर्मा, वास्तुदेव तथा माता अंगिरसी के पुत्र हैं. भारत के कुछ भाग में यह मान्यता है कि अश्विन मास की प्रतिपदा को विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ था लेकिन लगभग सभी मान्यताओं के अनुसार यही एक ऐसा पूजन है जो सूर्य के पारगमन के आधार पर तय होता है.
इसलिए प्रत्येक वर्ष यह 17 सितम्बर को मनाया जाता है. मंगलवार को होने वाली विश्वकर्मा पूजा की तैयारी जोर-शोर चल रही है. औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यह पूजा यहां बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास से मनायी जाती है. इस मौके पर औद्योगिक प्रतिष्ठानों, मोटर गैरेजों व पावर सब स्टेशनों, वाहन संगठनों व अन्यत्र भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा आकर्षक पंडालों में स्थापित कर पूजा-अचना की जाती है। इसके अलावा छोटे व बड़े वाहन मालिक अपने-अपने स्तर से गाड़ियों की साफ-सफाई कर पूजा करते हैं.
पूजा को लेकर विशेष चहल-पहल देखी जा रही है. विश्वकर्मा पूजा के लिए योजना तैयार कर घर से कटैया पावर हाउस पहुंचते हैं. हालांकि विश्वकर्मा पूजा को लेकर भीमनगर ओपी प्रभारी के द्वारा रविवार को ही एक आपातकालीन शांति समिति की बैठक की गई. जिसमें ओपी प्रभारी ने कटैया के मेले में होने वाले भीड़ भाड़ को नियंत्रित करने के लिए पूजा समिति से वोलेंटियर देने की बात कही. बताया गया कि पुलिस भी पूरी तरह चौकस रहेगी.
