शीतलहर कायम, अलाव ही सहारा

सुपौल : लगातार ठंड के कारण लोगों का जन-जीवन अस्त-व्यस्त है. एक तरफ जहां आमलोग इससे त्रस्त हो गये हैं. वहीं दूसरी तरफ सरकारी कार्यालयों में तैनात कर्मियों का भी ठंड से बुरा हाल है. स्थिति यह है कि आमलोग तो किसी तरह घर में दुबक कर भी ठंड से निजात पा लेते हैं. लेकिन […]

सुपौल : लगातार ठंड के कारण लोगों का जन-जीवन अस्त-व्यस्त है. एक तरफ जहां आमलोग इससे त्रस्त हो गये हैं. वहीं दूसरी तरफ सरकारी कार्यालयों में तैनात कर्मियों का भी ठंड से बुरा हाल है. स्थिति यह है कि आमलोग तो किसी तरह घर में दुबक कर भी ठंड से निजात पा लेते हैं. लेकिन कर्मियों के लिये सरकारी सेवा में रहते हुए ड‍्यूटी के दौरान इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. हालांकि कहीं-कहीं सरकारी कार्यालय परिसर में भी अलाव जलते देखे गये हैं.

जहां कुछ देर के लिये ही सही मौका मिलने पर ठंड से राहत के लिये कर्मी अलाव के पास कुछ देर गर्माहट महसूस कर लेते हैं. वर्तमान समय में 21 जनवरी को मानव शृंखला को लेकर सरकारी कार्यालयों में बैठक और जागरूकता को लेकर अभियान तेज है. ऐसे में सभी अधिकारी और कर्मी अपने-अपने क्षेत्र में युद्ध स्तर पर कार्यक्रम की सफलता को लेकर व्यस्त देखे जा रहे हैं. इधर ठंड है कि घटने का नाम नहीं ले रहा है. बुधवार को भी तापमान नीचे ही रहा. इस दौरान अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 08 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं शीतलहर को सर्द करने वाली पछुआ हवा की रफ्तार करीब छह किलोमीटर प्रतिघंटा रहा.

जिसके चलते वातावरण में ठंड का एहसास पूरे दिन बरकरार रहा. हालांकि 01 बजे के करीब थोड़ी देर के लिये धूप खिली. लेकिन बहुत जल्द ही चंद घंटों के बाद तापमान का स्तर गिरने लगा और लोगों को ठंड का एहसास एकबार फिर होने लगा. ऐसे में जहां बाजार में चहल-पहल घटने लगी वहीं समाहरणालय परिसर का आलम यह रहा कि यहां काम पर जमे रहने के कारण थोड़ी देर ही सही परिसर में अलाव के पास रह कर कुछ देर कर्मी अलाव तापते नजर आये. लोगों का कहना है कि इतनी भीषण ठंड जो लगातार कई सप्ताह से जारी है, कभी नहीं देखे. लिहाजा जान बचाने के लिये लोग कुछ देर अलाव के पास जम जाते हैं. शरीर में गर्म कपड़े भी लोगों को सुकुन नहीं दे रही है. जब तक अलाव का सहारा नहीं ले लिया जाय, आदमी ठंड से बेचैन रहता है. सबसे बड़ी परेशानी सरकारी कर्मी को उस दौरान उठाना पड़ता है, जब देर शाम तक खुले मैदान में मानव शृंखला को लेकर तैयारी में जुटे रहते हैं. इतना ही नहीं मानव शृंखला को लेकर आमलोगों की भी भारी संख्या में सहभागिता निभाना कहीं न कहीं ठंड पर लोगों का जज्बा भारी पड़ रहा है.

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