उदासीनता. विकास की रोशनी से कोसों दूर है हरदी पूरब पंचायत का वार्ड नंबर एक
आठ सौ की आबादी वाले सदर प्रखंड अंतर्गत हरदी पूरब पंचायत स्थित वार्ड नंबर एक के लोगों को आज भी कच्ची सड़क पर आवागमन करने की विवशता बनी हुई है. इस टोला में बसे लोगों को बिजली की सुविधा उपलब्ध करा दिया गया है. लेकिन यातायात की व्यवस्था की दिशा में पहल नहीं किया गया है. जिस कारण लोगों को कच्ची सड़क के सहारे आवाजाही करने पर विवश होना पड़ रहा है.
सुपौल : सदर प्रखंड अंतर्गत हरदी पूरब पंचायत स्थित वार्ड नंबर एक आज भी विकास की रोशनी से कोसों दूर है. सरकार द्वारा प्रत्येक दो सौ की आबादी वाले टोले को मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पक्की सड़क से जोड़ने की कवायद चल रही है. लेकिन करीब आठ सौ की आबादी वाले इस टोले के लोगों को आज भी कच्ची सड़क पर आवागमन करने की विवशता बनी हुई है. इस टोला में बसे लोगों को बिजली की सुविधा उपलब्ध करा दिया गया है. लेकिन यातायात की व्यवस्था की दिशा में पहल नहीं किया गया है.
जिस कारण लोगों को कच्ची सड़क के सहारे आवाजाही करने पर विवश होना पड़ रहा है. कच्ची सड़क रहने के कारण खासकर बारिश के मौसम में लोगों को भारी परेशानी हो रही है. करीब दो माह पूर्व इस टोले में मनरेगा के तहत ईंट सोलिंग सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया. लेकिन सड़क के मिट्टीकरण का कार्य करने के उपरांत उक्त सड़क पर ईंट सोलिंग का कार्य नहीं कराया जा सका. कार्य प्रारंभ होने के बाद स्थानीय लोगों में यह उम्मीद जगी थी कि अब उनलोगों को चकाचक यातायात की व्यवस्था उपलब्ध होगी. लेकिन लोगों का यह सपना महज सपना बन कर ही
रह गया.
यातायात की समस्या से जूझ रहे टोलावासी
गौरतलब हो कि इस टोले में पहुंचने के लिए लोग नहरी पर बने रास्ते का सहारा लेते हैं, जो जंगल से भड़ा पड़ा है. सुखाड़ के समय में यहां के लोग किसी तरह इस रास्ते से आवागमन करते हैं.लेकिन हल्की बारिश के बाद ही इस रास्ते पर आवागमन अवरुद्ध हो जाता है. अधिकारी व स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा उपेक्षित इस टोले में मूलभूत सुविधा का घोर अभाव है. जबकि यह टोला मां वन दुर्गा मंदिर से सटे पूरब व उत्तर दिशा में अवस्थित है. इस टोले तक पहुंचने के लिए वन दुर्गा मंदिर हो कर ही लोग आया-जाया करते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि उक्त समस्या को लेकर कई बार वे लोग जनप्रतिनिधि व अधिकारियों का दरवाजा खटखटा चुके हैं. इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है.
कहते हैं ग्रामीण
अमल यादव ने बताया कि सड़क को लेकर कई बार जनप्रतिनिधि से गुहार लगा चुके हैं. लेकिन वहां से आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला है.
संजय कुमार ने कहा कि विकास के इस दौर में भी इस टोले के लोगों को उपेक्षित रखा गया है.टोले के लोगों को बाहर निकलने के लिए एक मात्र कच्ची सड़क है जो बारिश के मौसम में कीचड़ मय हो जाता है.
राजेश कुमार ने कहा कि इस बस्ती में रहने वाले एक बड़ी आबादी को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जाना चिंताजनक है. कहा कि हर चुनाव के समय वोट मांगने पहुंचने वाले नेता इस समस्या के समाधान का दावा करते हैं. लेकिन चुनाव समाप्त होते ही इसे भुला दिया जाता है.
मोहन कुमार ने कहा कि इस टोले के लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है. आज तक कोई भी पदाधिकारी यहां रहने वाले लोगों की सुधि लेने तक नहीं पहुंच सके हैं.यही स्थिति जनप्रतिनिधियों की है जो चुनाव के बाद दुबारा वापस नहीं आते हैं.
