गरीबी के कारण रािश का भुगतान नहीं कर पा रहे परिजन
प्रसूता को निकलवाने के लिए सरपंच के पास पहुंचे रिश्तेदार
छातापुर : मुख्यालय स्थित बस पड़ाव के पास संचालित एक निजी क्लीनिक में राशि का भुगतान नहीं कर पाने के कारण एक प्रसूता अपने शिशु के साथ चिकित्सक के कब्जे में है. यह मामला तब प्रकाश में आया जब प्रसूता के रिश्तेदार चिकित्सक की शिकायत लेकर गुरुवार को स्थानीय सरपंच के घर पहुंची और अपनी गरीबी बयां करते हुए चिकित्सक के चंगुल से मुक्त कराने का आग्रह किया. जानकारी के अनुसार माधोपुर पंचायत के वार्ड नंबर 14 निवासी सबीरा खातून के पति मो दिलशाद मजदूरी के लिए बाहरी प्रदेश में है. बुधवार की सुबह प्रसव पीड़ा के बाद प्रसूता अपनी सास जलेशा खातून के साथ पीएचसी छातापुर पहुंची थी.
जहां उसे भर्ती कर लिया गया. लेकिन प्रसव कक्ष में ड्यूटी पर तैनात एएनएम ने प्रसूता की स्थिति नाजुक बताते हुए खुद से ही पर्ची पर लिखकर रेफर कर दिया. इसके बाद प्रसूता को आशा के सहयोग से निजी क्लीनिक में भर्ती कराने में मदद की. हैरत की बात है कि गंभीर स्थिति बतायी गयी प्रसूता का निजी क्लीनिक में बिल्कुल ही आसान तरीके से प्रसव हो गया. जहां जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित है.
पीएचसी में स्थिति गंभीर बता किया रेफर, क्लिनिक में आसानी से हुआ प्रसव
सरकार ने भले ही प्रसूता को आसान प्रसव का लाभ देने के लिए पीएचसी में पर्याप्त संसाधन व चिकित्सा कर्मियों को उपलब्ध कराया है. ताकि आर्थिक समस्या से जूझ रहे महिलाओं को सुरक्षित प्रसव का लाभ दिया जा सके. लेकिन प्रसव कक्ष में ड्यूटी पर तैनात रहने वाली चिकित्सा कर्मी सुरक्षित प्रसव कराने का लाभ देने के बजाय परिजनों को भयभीत करते हैं और निजी स्वार्थ से वशीभूत कर्मी प्रसूता की गंभीर स्थिति बताकर उसके साथ रेफर का खेल खेलते हैं. ताकि सुनियोजित तरीके से सांठ-गांठ वाले निजी क्लीनिक में उसे भर्ती कराया जा सके. निजी क्लीनिक में गुरुवार को मौजूद प्रसूता की सास जलेसा खातून ने बताया कि पीएचसी से बुधवार की दोपहर अचानक ही रेफर कर दिया गया. इसके बाद वह निजी क्लीनिक में पहुंची. जहां चिकित्सक द्वारा 15 हजार रुपये में प्रसव कराने की बात कही गयी. उनके द्वारा दो प्रकार के इंजेक्शन एवं एक बोतल पानी चढ़ाने के बाद आसानी से प्रसव हो गया. बताया कि प्रसव होने के बाद अब चिकित्सक तुरंत भुगतान की बात करते उनलोगों को घेर कर रखा है. गरीबी के कारण पैसा का इंतजाम करना उनके लिये मुश्किल हो रहा है. जबकि प्रसूता के दो छोटे-छोटे बच्चे घर पर परेशान हैं. आरजु मिन्नत के बाद चिकित्सक ने 12 हजार रुपये देने को कहा और जब तक भुगतान नहीं करेगी, तब तक क्लीनिक पर ही ठहरना पड़ेगा.
