दो थानों के बीच बंटा है सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड, परेशानी

पांच पंचायत के लोगों को थाना संबंधी मामले में होती है फजीहत भपटियाही थाना को सात पंचायतों की सुरक्षा की है जिम्मेवारी सरायगढ़ : सरकार समाज के हासिये पर जीवन-बसर कर रहे परिवारों तक विकास की रोशनी पहुंचाने की बात कर रही है. विकास कार्य को लेकर जहां अनेकों योजनाएं संचालित कर करोड़ों-अरबों की राशि […]

पांच पंचायत के लोगों को थाना संबंधी मामले में होती है फजीहत

भपटियाही थाना को सात पंचायतों की सुरक्षा की है जिम्मेवारी
सरायगढ़ : सरकार समाज के हासिये पर जीवन-बसर कर रहे परिवारों तक विकास की रोशनी पहुंचाने की बात कर रही है. विकास कार्य को लेकर जहां अनेकों योजनाएं संचालित कर करोड़ों-अरबों की राशि खर्च की जा रही है. वहीं सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड स्थापना के 24 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी संसाधनों के घोर अभाव से जूझ रहा है. स्थिति ऐसी बनी हुई है कि यह प्रखंड दो थानों में बंटे रहने से जहां प्रशासन को आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने में परेशानी हो रही है. वहीं लोगों को भी इंसाफ के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है.
प्रखंड क्षेत्र के पांच पंचायत किसनपुर थाना के अधीन हैं और भपटियाही थाना को सात पंचायतों के सुरक्षा की जिम्मेवारी है. स्थिति यह है कि प्रखंड सह अंचल कार्यालय, सीडीपीओ कार्यालय, रेलवे स्टेशन, पशु स्वास्थ्य केंद्र, निरीक्षण भवन आदि कार्यालय भी किसनपुर थाना के ही अधीन है. यहां से किसनपुर थाना की दूरी करीब 13 किलोमीटर है. वहीं इन कार्यालयों से भपटियाही थाना की दूरी महज आधा किलोमीटर से भी कम है. बावजूद किसी प्रकार की घटना के बाद भपटियाही पुलिस द्वारा क्षेत्राधीन नहीं रहने के कारण किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती.चुनावी मौसम में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों द्वारा इस मुद्दे को काफी जोर-शोर से उठाया जाता है. चुनाव समाप्त होते ही इस मुद्दे को राजनेता भूल जाते हैं.
इंधन में प्रतिदिन हजारों रुपये होता है खर्च
प्रखंड के पांच पंचायत किसनपुर थाना के अधीन रहने एवं एनएच 57 स्थित टोल प्लाजा तक की जवाबदेही किसनपुर पुलिस के जिम्मे रहने के कारण पुलिस को प्रतिदिन हजारों रुपये इंधन के मद में व्यय करना पड़ता है. सरायगढ़ तक 13 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद किसनपुर पुलिस टोल प्लाजा तक गश्त लगाती है. ऐसे में समय के साथ-साथ धन का भी अपव्य हो रहा है. इस ओर अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं दिये जाने से स्थिति विकट बनी हुई है. लोगों का मानना है कि यदि प्रखंड के पांच पंचायतों को भपटियाही थाना के अधीन कर दिया जाता है तो प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेहतर होगा. वहीं लोगों को भी कठिनाईयों का सामना नहीं करना पड़ेगा.
घटना के बाद समय पर नहीं पहुंचती पुलिस
किसनपुर थाना की यहां से अधिक दूरी रहने के कारण किसी प्रकार की घटना के बाद सूचना के बावजूद किसनपुर पुलिस विलंब से पहुंचती है. यही वजह है कि मामलों के उद्भेदन में भी काफी समय लगता है. नजदीक में भपटियाही थाना रहने और घटना की जानकारी के बावजूद यहां की पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती है. वहीं यहां के लोगों को 13 किलो मीटर की दूरी तय कर किसनपुर थाना जाना पड़ता है. यदि प्रखंड के सभी 12 पंचायतों को भपटियाही थाना के अधीन कर दिया जाता है तो लोगों की परेशानी भी कम होगी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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