शहीद जवान श्रीराम यादव का शव गांव पहुंचा

मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पुरैना निवासी शहीद एसटीएफ जवान 31 वर्षीय श्रीराम यादव को उनके पैतृक गांव के शमशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया. वे मोतिहारी में अपराधियों से मुठभेड़ में सोमवार की रात शहीद हो गए थे.

प्रतिनिधि, सीवान. मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पुरैना निवासी शहीद एसटीएफ जवान 31 वर्षीय श्रीराम यादव को उनके पैतृक गांव के शमशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया. वे मोतिहारी में अपराधियों से मुठभेड़ में सोमवार की रात शहीद हो गए थे. सोमवार को पुलिस को सूचना मिली थी कि किचकिया थाना क्षेत्र के सिहोरवा गांव में कुंदन ठाकुर गिरोह के सदस्य हथियारों के साथ एक दोस्त के घर में छिपे हुआ हैं. इसके बाद पुलिस टीम ने छापेमारी की जहां पुलिस और बदमाशों के बीच रात्रि तकरीबन ढाई बजे मुठभेड़ हुई. इस दौरान मुठभेड़ में मुजफ्फरपुर के शातिर अपराधी कुंदन ठाकुर समेत दो बदमाश मारे गए, जबकि एसटीएफ का जवान श्रीराम यादव शहीद हो गये सम्मान के साथ श्रीराम यादव का पार्थिव शरीर मंगलवार को फूलों से सजी गाड़ी में उनके गांव सीवान के पुरैना लाया गया .वाहन के गांव में प्रवेश करते ही माहौल गमगीन हो गया और बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए जुट गए.पार्थिव शरीर को देखते ही पत्नी बेसुध होकर गिर गई.पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई.पार्थिव शरीर पर उनकी मां व पत्नी सिंधू देवी ने नम आंखों से पुष्पचक्र अर्पित किया. वहीं सारण रेंज के डीआइजी निलेश कुमार, जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय, पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा सहित पुलिस पदाधिकारी अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी पुष्प चक्र अर्पित करते हुए नमन किया..बलिदानी की छह वर्षीय पुत्री व चार वर्ष के पुत्र पार्थिव शरीर से लिपटकर रोने लगे. लोगों द्वारा भारत माता की जय, वंदे मातरम के नारे गुंजायमान हो उठे थे.इस दौरान पूरे सम्मान के साथ सभी ग्रामीणों ने उन्हें अंतिम विदाई दी. बड़े भाई ने तिरंगा लेने से किया मना- जवान श्रीराम यादव के मौत के बाद सभी दहाड़ मार कर रो रहे थे. वहीं, शहीद के बड़े भाई ने तिरंगा लेने से मना कर दिया. उनका कहना है, मुठभेड़ के दौरान सारे पुलिसकर्मी पीछे हट गए अकेले मेरे भाई ने दोनों अपराधियों को मारा है. जब तक अपराधियों को नहीं मारेंगे, तिरंगा नहीं लेंगे जवान के बड़े भाई घंटे अपनी बातों पर अड़े रहे. सात साल पहले हुई थी जवान की शादी- बताया जाता हैं कि जवान श्रीराम यादव की शादी सात साल पहले हुई थी. जिसके दो बच्चे हैं, छह साल की बड़ी बेटी अंशिका कुमारी है जबकि एक छोटा बेटा चार साल का अंश कुमार है. दोनों पिता के आने का इंतजार कर रहे थे. सोमवार रात तकरीबन 10:30 बजे श्रीराम पत्नी से कहकर निकले थे कि रेड पर जा रहा हूं.जहां 2.30 बजे मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई. तीन बजे पत्नी को सूचना मिली कि श्रीराम को चोट लगी हैं- जवान श्रीराम की पत्नी सिन्धू देवी ने बताया कि रात में 10.30 बजे पुलिस वाले घर आए. मेरे पति से कहा कि चलो छापेमारी करनी है. मेरे पति ने कहा कि कितने लोग हैं. पुलिस वालों ने कहा कि लोग तो कम हैं, लेकिन चलना जरूरी है. उसके बाद मेरे पति ने कहा कि तुम जाओ हम आते हैं. 3 बजे रात में फोन आया कि आपके पति को चोट लगी है. अस्पताल आने पर पता चला कि उनकी मौत हो गई है. तीन भाइयों में मझले थे श्रीराम- श्रीराम यादव तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर मझले थे. बड़े भाई गांव पर ही रहते हैं. जबकि छोटे भाई की पिछले साल 2025 में बिहार पुलिस में नौकरी लगी है और वे अभी ट्रेनिंग में रोहतास में है. उनके पिता गांव में ही किराना दुकान चलाते हैं. 2014 में उनकी बिहार पुलिस ने बहाली हुई थी. चार साल के पुत्र ने दी मुखाग्नि- . मंगलवार को अंतिम संस्कार के दौरान उनके 4 साल के छोटे बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी. यह मार्मिक दृश्य देख हर किसी की आंखें नम हो गईं. गोद में लेकर जब उन्हें मुखाग्नि दी जा रही थी तो सभी के आंखों से आंसू छलक उठा. बताया जाता हैं कि अंतिम यात्रा में सारण रेंज के डीआइजी निलेश कुमार और पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए शव को कंधा दिया.

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By DEEPAK MISHRA

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