सूखने लगे तालाब तो मछुआरों की बढ़ी परेशानी

. लगातार गर्म पछुवा हवा व तेज धूप की वजह से अप्रैल में ही प्रखंड के आधे से अधिक तालाब सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं.भीषण गर्मी व तपिश ने मानव ही नहीं पशु-पक्षियों को बेहाल कर दिया है

सिसवन . लगातार गर्म पछुवा हवा व तेज धूप की वजह से अप्रैल में ही प्रखंड के आधे से अधिक तालाब सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं.भीषण गर्मी व तपिश ने मानव ही नहीं पशु-पक्षियों को बेहाल कर दिया है.प्यास बुझाने के लिए बेजुबान भटक रहे हैं.मछली पालक भीषण गर्मी में पंप सेट चला कर तालाब में पानी भर रहे हैं.ताकि मछली को बचाया जा सके. सरकारी तालाबों में दरारें फट गई हैं.मत्स्य पालक किसानों का कहना है कि सरकारी स्तर पर तालाबों में पानी भरने की व्यवस्था नहीं होने के चलते मछलियां मरने के कगार पर हैं. हिट वेव चलने से तलाब का पानी गर्म हो चुका है, जिससे मछलियों का विकास रूक गया है.मत्स्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक हेक्टेयर भूमि के तालाब से एक सीजन में करीब 35 सौ से 4 हजार किलो तक मछली का उत्पादन होता है. जानकारों के अनुसार 40 डिग्री से अधिक तापमान रहने पर पशु-पक्षियों को लू लगने से लेकर डिहाईड्रेशन सहित कई बीमारियां उन्हें जकड़ लेती हैं. कचरा फेंकने से भर गये अधिकांश जलाशय बताया जाता है की पहले कुंआ और तालाब के पानी का उपयोग लोग पीने के लिए करते थे.पर अब इसका उपयोग जल संचय के बजाय कूड़ा-कर्कट फेंकने के रूप में किया जा रहा है.जल संरक्षण के संवाहक स्रोतों के निर्माण कार्य पर मनरेगा सहित अन्य योजनाओं के तहत लाखों रुपये प्रतिवर्ष खर्च हो रहे हैं.लेकिन,जो पूर्व से निर्मित धरोहर हैं,उनका रख-रखाव व साफ-सफाई कराना क्या संभव नहीं है.

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