Siwan News: (अमर नाथ शर्मा की रिपोर्ट) सीवान के महावीरी सरस्वती विद्या मंदिर, विजयहाता में आयोजित विद्या भारती की 37वीं प्रांतीय समूह खेलकूद प्रतियोगिता मंगलवार को उत्साह, अनुशासन और गरिमामय माहौल के बीच संपन्न हो गई. समापन समारोह में खिलाड़ियों को हार-जीत से ऊपर उठकर निरंतर प्रयास करने और खेल भावना बनाए रखने का संदेश दिया गया.
समारोह को संबोधित करते हुए लोक शिक्षा समिति, बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह ने कहा कि खेल जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक होता है. उन्होंने कहा कि हार और जीत दोनों ही सफलता की सीढ़ियां हैं तथा गिरकर दोबारा उठना ही जीवन का वास्तविक नियम है. उन्होंने खिलाड़ियों को निराश न होकर निरंतर आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी.
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. शरद चौधरी ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को विद्वान बनाती है, जबकि खेलकूद उसे अनुशासित, संघर्षशील और आत्मविश्वासी बनाता है. उन्होंने विद्यार्थियों से खेल भावना के साथ जीवन में आगे बढ़ने का आह्वान किया. कार्यक्रम का संचालन प्रवासी कार्यकर्ता गणेश कुमार ने किया. विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कुमार विजय रंजन ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सिवान विभाग निरीक्षक अनिल कुमार राम ने किया.
1250 लोगों की रही सहभागिता
खेलकूद विभाग के प्रांतीय मार्गदर्शक ललित कुमार राय ने प्रतियोगिता का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि कबड्डी एवं खो-खो की विभिन्न आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में प्रांत के 39 विद्यालयों से 582 भैया एवं 304 बहनों ने हिस्सा लिया. इसके अलावा 60 संरक्षक आचार्य, 40 निर्णायक तथा आठ पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं सहित कुल 1250 लोगों की प्रत्यक्ष सहभागिता रही.
मेडल दे कर खिलाड़ियों को किया गया सम्मानित
समापन समारोह में विजेता एवं उपविजेता टीमों को शील्ड देकर सम्मानित किया गया. वहीं सभी खिलाड़ियों को मेडल और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए. पुरस्कार वितरण का नेतृत्व प्रवासी कार्यकर्ता रंजीत कुमार भारती ने किया.
मौके पर कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. इस अवसर पर प्रोफेसर रविन्द्र पाठक, जीव नारायण, प्रोफेसर शम्भू प्रसाद सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे. वहीं क्षेत्रीय मीडिया समन्वयक नवीन सिंह परमार, ओमप्रकाश दुबे, पारस नाथ सिंह, शम्भू शरण तिवारी, कमलेश नारायण सिंह एवं रविन्द्र राय सहित विद्यालय परिवार के दर्जनों सदस्य उपस्थित रहे.
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