सीवान नगर परिषद के पूर्व ईओ राजकिशोर लाल पर कार्रवाई, तीन वेतनवृद्धि रोकी गयीं, जानिए क्या है मामला?

सीवान नगर परिषद के पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी राजकिशोर लाल को वित्तीय अनियमितता के आरोप में बिहार सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. उन पर सड़क चौड़ीकरण और भूमि खरीद में गड़बड़ी के आरोप थे. इसके चलते उनकी तीन वेतनवृद्धियों पर रोक लगा दी गई है.

Siwan nagar parishad: सीवान नगर परिषद के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी और बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजकिशोर लाल के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता के मामले में बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने कार्रवाई की है. विभाग ने संचयात्मक प्रभाव से उनकी तीन वेतनवृद्धि पर रोक लगाने का दंड अधिरोपित किया है. बिहार लोक सेवा आयोग ने भी सरकार की ओर से प्रस्तावित दंड पर सहमति दे दी है. इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में संकल्प जारी किया है.

राजकिशोर लाल पर सीवान नगर परिषद में कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में पदस्थापन के दौरान सड़क चौड़ीकरण योजना और कूड़ा निस्तारण एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए भूमि खरीद में वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप था. नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से उनके विरुद्ध आरोप पत्र तैयार कर सामान्य प्रशासन विभाग को उपलब्ध कराया गया था.

सड़क चौड़ीकरण और भूमि खरीद में अनियमितता का आरोप

सड़क चौड़ीकरण कार्य की प्राक्कलित राशि 49 लाख 91 हजार 500 रुपये थी, जबकि कूड़ा निस्तारण के लिए भूमि खरीद में करीब चार करोड़ रुपये खर्च किये गये थे.

विभागीय कार्रवाई के दौरान राजकिशोर लाल से कई चरणों में स्पष्टीकरण और बचाव बयान मांगा गया. उनके स्पष्टीकरण पर नगर विकास एवं आवास विभाग से भी मंतव्य लिया गया. प्राप्त मंतव्य में उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार योग्य नहीं पाया गया.

मामले की गंभीरता को देखते हुए 21 मई 2025 को विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गयी और मुख्य जांच आयुक्त, बिहार को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया.

जांच में कई आरोप प्रमाणित

जांच प्रतिवेदन में कुछ आरोपों को अप्रमाणित माना गया, जबकि आरोप संख्या दो के कई उपखंडों और आरोप संख्या तीन को प्रमाणित पाया गया. इसके बाद जांच प्रतिवेदन की प्रति राजकिशोर लाल को उपलब्ध कराकर उनसे दोबारा बचाव बयान मांगा गया.

उनके जवाब की समीक्षा के बाद अनुशासनिक प्राधिकार ने गंभीर वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को सही पाया.

विशेष बैठक बुलाने के औचित्य पर भी सवाल

जांच में पाया गया कि नगर परिषद की विशेष बैठक बुलाने के औचित्य को स्पष्ट नहीं किया गया था. संबंधित बैठकों के आयोजन का समय दर्ज नहीं होने के कारण बिहार नगरपालिका अधिनियम में निर्धारित 72 घंटे की अवधि के पालन पर भी सवाल उठे. विभाग ने माना कि सामान्य बैठक में ही सशक्त स्थायी समिति के निर्णय का अनुमोदन कराया जा सकता था.

निर्धारित सीमा से बाहर खरीदी गयी जमीन

भूमि खरीद के मामले में भी निर्धारित शर्तों के उल्लंघन की बात सामने आयी. पहली निविदा में नगर क्षेत्र की सीमा से 10 किलोमीटर के अंदर जमीन होने की शर्त रखी गयी थी, लेकिन खरीदी गयी भूमि इस सीमा से अधिक दूरी पर स्थित पायी गयी.

राजकिशोर लाल ने अपने अभ्यावेदन में भी जमीन के निर्धारित सीमा से कुछ अधिक दूर होने की बात स्वीकार की थी. हालांकि, यह प्रमाणित करने वाला कोई साक्ष्य नहीं दिया गया कि 10 किलोमीटर की परिधि में निजी जमीन खरीदने का वास्तविक प्रयास किया गया था.

निविदा में पहुंच पथ की चौड़ाई 12 फीट निर्धारित थी, लेकिन संबंधित प्रतिवेदनों में इस शर्त के अनुपालन का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला. विभाग ने यह भी माना कि जमीन संबंधी प्रतिवेदन प्राप्त होने से पहले ही सशक्त स्थायी समिति और विशेष बैठक में स्वीकृति दे दी गयी थी.

नगर परिषद सीवान

किसानों के खातों के बजाय दूसरी संस्था को भुगतान

जांच में भूमि खरीद की राशि के भुगतान को भी गंभीर मामला माना गया. विभागीय दिशा-निर्देश के अनुसार भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से संबंधित किसानों के बैंक खातों में किया जाना था. लेकिन राशि यूनिक डेवलपर्स नामक संस्था के खाते में स्थानांतरित की गयी.

इसके बाद बड़ी राशि सुबोध कुमार निराला के खाते में भी भेजे जाने की बात जांच में सामने आयी. विभाग ने इसे निर्धारित वित्तीय प्रक्रिया और पारदर्शिता के सिद्धांतों के विपरीत माना.

बीपीएससी ने 13 अगस्त को दी दंड प्रस्ताव पर सहमति

संपूर्ण मामले की समीक्षा के बाद अनुशासनिक प्राधिकार ने राजकिशोर लाल के बचाव बयान को अस्वीकार कर संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि रोकने का निर्णय लिया. दंड प्रस्ताव पर बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श मांगा गया था. आयोग ने 13 अगस्त 2026 को दंड प्रस्ताव पर अपनी सहमति प्रदान कर दी.

इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने बिहार सरकारी सेवक नियमावली के तहत राजकिशोर लाल की संचयात्मक प्रभाव से तीन वेतनवृद्धि रोकने का आदेश जारी किया है. सरकार के अवर सचिव राजीव कुमार तिवारी के हस्ताक्षर से जारी संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र के अगले असाधारण अंक में प्रकाशित करने का भी आदेश दिया गया है.

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By Vivek Kumar

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