कैदियों को मिलेगी मुफ्त कानूनी मदद

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर पटना उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम ने बुधवार को मंडल कारा का दौरा किया. टीम ने कैदियों से मिलकर उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता देने की प्रक्रिया शुरू की

सीवान. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर पटना उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के वरिष्ठ अधिवक्ताओं की टीम ने बुधवार को मंडल कारा का दौरा किया. टीम ने कैदियों से मिलकर उन्हें मुफ्त कानूनी सहायता देने की प्रक्रिया शुरू की. टीम में उच्च न्यायालय पटना के अधिवक्ता सुरेश प्रसाद शर्मा, अशोक कुमार मिश्रा ,शिव सागर शर्मा, उमेश कुमार राय ,मणि शंकर प्रसाद सिन्हा और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सुनील कुमार,मुख्य एलएडीसीएस बलवंत कुमार शामिल थे. टीम ने उन दोषियों की पहचान की जिनकी सजा उच्च न्यायालय ने बरकरार रखी है. साथ ही ऐसे दोषी भी चिन्हित किए गए जिनकी दोषमुक्ति को पलटते हुए उच्च न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहराया है. इसके अलावा ऐसे कैदी भी शामिल हैं जिनके छूट या रिहाई उच्च न्यायालय द्वारा अस्वीकार की गई है. उन्हें भी सूचीबद्ध किया गया. बताया जाता हैं कि सर्वोच्च न्यायालय का मत है कि जेलों में ऐसे कैदी हो सकते हैं जो सर्वोच्च न्यायालय में अपील या याचिका दायर करना चाहते हैं. ऐसे कैदियों को उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति से मुफ्त कानूनी सहायता लेने का अधिकार है.इस उद्देश्य से विधिक सेवा संस्थानों द्वारा उच्च गुणवत्ता की सेवाएं दी जा रही हैं. टीम के सदस्यों ने मंडल कारा के हर वार्ड का दौरा किया टीम के सदस्यों ने मंडल कारा के हर वार्ड का दौरा किया. कैदियों से बातचीत कर उन्हें दी जा रही कानूनी सहायता की जानकारी ली. सजायाफ्ता कैदियों को भरोसा दिलाया गया कि यदि उन्हें कानूनी मदद की जरूरत है तो जिला न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक मुफ्त, गुणवत्तापूर्ण और असरदार विधिक सेवाएं दी जाएंगी. साथ ही उन्हें उनके अधिकारों की जानकारी भी दी गई. मंडल कारा में इस समय 34 महिला बंदियों सहित कुल 910 कैदी बंद हैं. सभी को बताया गया कि यदि वे संतुष्ट नहीं हैं तो जेल के माध्यम से मुफ्त विधिक सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं. टीम ने संतोष जताया कि जिला विधिक सेवाएं देने में अग्रणी है.मौके पर काराधीक्षक डॉ. देवाशीष कुमार सिन्हा,उपाधीक्षक दिनेश कुमार ठाकुर, कारा चिकित्सक डॉ. घनश्याम प्रसाद सहित अन्य लोग मौजूद थे.

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Author: DEEPAK MISHRA

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