नगर परिषद कार्यालय में पार्षदों के पत्र कूड़े में फेके मिले

नगर परिषद कार्यालय में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद और कई वार्ड पार्षदों द्वारा दिए गए पत्र कूड़े के ढेर में फेंके हुए पाए गए.इस घटना के सामने आने के बाद जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है और उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताया है.

प्रतिनिधि, सीवान. नगर परिषद कार्यालय में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मुख्य पार्षद, उप मुख्य पार्षद और कई वार्ड पार्षदों द्वारा दिए गए पत्र कूड़े के ढेर में फेंके हुए पाए गए.इस घटना के सामने आने के बाद जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है और उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही बताया है. बताया जा रहा है कि पार्षद अपने-अपने वार्ड की समस्याओं को लेकर समय-समय पर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को आवेदन देते रहे हैं. इन पत्रों में साफ-सफाई, जलजमाव, सड़क, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी समस्याओं का जिक्र होता था. लेकिन इन समस्याओं के समाधान के बजाय संबंधित पत्रों को नजरअंदाज करते हुए कूड़े के रूप में फेंक दिया गया. शनिवार को जब कुछ पार्षद नगर परिषद कार्यालय पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि एक जगह पर कूड़े के साथ उनके दिए गए पत्र भी पड़े हुए हैं. यह देख सभी पार्षद हैरान और नाराज हो गए. उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से जनता की आवाज प्रशासन तक पहुंचती है, लेकिन अगर उन पत्रों को ही इस तरह फेंक दिया जाएगा तो समस्याओं का समाधान कैसे होगा. इस मामले को लेकर उप मुख्य पार्षद किरण गुप्ता, पार्षद जयप्रकाश गुप्ता, सचिन सिंह, संतोष यादव और पूर्व पार्षद अमित सिंह सहित कई अन्य पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी नीलम श्वेता से शिकायत की.शिकायत मिलते ही कार्यपालक पदाधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया. जांच के दौरान यह सही पाया गया कि कई पत्र कूड़े के रूप में फेंके गए थे. इसके बाद उन्होंने संबंधित आगत-निर्गत (डाक) देखने वाले कर्मी से पूछताछ की और कुछ दस्तावेज अपने पास लेकर जांच शुरू कर दी. कार्यपालक पदाधिकारी ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और संबंधित रजिस्टर की मांग की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गलती कहां हुई है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. वहीं पार्षदों ने मांग की है कि इस मामले में जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो और जनता की समस्याओं का सही तरीके से समाधान हो सके.

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By DEEPAK MISHRA

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