संवाददाता,सीवान. अमेरिका व इजराइल के साथ इरान के जारी युद्ध की तपिश का असर अब बाजार पर भी साफ दिखने लगा है.हर दिन रसोई गैस की उम्मीद में जिले के एजेंसियों पर लंबी कतार में घंटो लोग खड़े नजर आ रहे हैं, संकट का असर सरकारी स्कूलों में संचालित एमडीएम पर देखने को मिल रहा है.रसोई गैस की जगह लकड़ी के जुगाड़ में प्रधानाध्यापक से लेकर रसोइयों का दिन गुजर रहा है.संकट से बाजार भी अछूता नहीं रह गया है.वैकल्पिक उर्जा के साधनों पर महंगाई की मार साफ नजर आ रही है. मंगलवार को भी जिला प्रशासन ने बयान जारी कर जिले में रसोई गैस संकट न होने की अपनी दलील देता रहा.उधर अब तक के 25 दिन के युद्ध का साइड इफेक्ट जिले में हर तरफ देखने को मिल रहा है.इससे लोगों के रसोई घर से लेकर बाजार तक तथा सरकारी की योजनाओं पर भी जिले में असर पड़ा है. काेयला के 600 व लकड़ी 100 रुपये क्विंटल बढ़े दाम रसोई गैस संकट के चलते ही लोगों का कहना है कि अन्य वैकल्पिक साधनों की मांग बढ़ गयी है.जिसका नतीजा है कि उन सामानों के दाम भी बढ़े हैं.जिले में होटल से लेकर रेस्टोरेंट में अब कोयले व लकड़ी के चूल्हे में खाद्य सामग्रियां तैयार की जा रही है.ऐसे में पहले 1600 रुपये क्विंटल मिलने वाला कोयला अब 2200 रुपये हो गया है.यही हाल जलावन की लकड़ियों का भी है.500 रुपये कुंतल की लकड़ी के 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल दाम बढ़े हैं. स्कूलों में बच्चों को दोपहर का भोजन खिलाने में छूट रहे पसीने जिले के कक्षा आठ तक के सभी स्कूलों के बच्चों को एमडीएम के तहत दोपहर का भोजन देना अनिवार्य है.इसको लेकर सभी स्कूलों में रसोइयों की तैनाती के साथ ही घरेलू गैस सिलिंडर दिये गये हैं.इस बीच एलपीजी संकट के चलते इन चूल्हों की लौ धीमी पड़ने लगी है,तो कई जगह चूल्हा बूझने के हालात हैं.इसका नतीजा है कि शासन स्तर पर भी हर दिन अलर्ट किया जा रहा है.पीएम पोषण योजना के निदेशक ने फरमान जारी कर जिला के शिक्षा विभाग के अफसरों से किसी भी हालत में भोजन बनाने का कार्य रूकने नहीं देने की हिदायत दी है.इसको लेकर डीपीओ एमडीएम जय कुमार ने सभी प्रधानाध्यापक को वैकल्पिक इंतजाम करने का निर्देश दिया है.
कोयला व लकड़ी के दाम बढ़े
अमेरिका व इजराइल के साथ इरान के जारी युद्ध की तपिश का असर अब बाजार पर भी साफ दिखने लगा है.हर दिन रसोई गैस की उम्मीद में जिले के एजेंसियों पर लंबी कतार में घंटो लोग खड़े नजर आ रहे हैं, संकट का असर सरकारी स्कूलों में संचालित एमडीएम पर देखने को मिल रहा है.रसोई गैस की जगह लकड़ी के जुगाड़ में प्रधानाध्यापक से लेकर रसोइयों का दिन गुजर रहा है.संकट से बाजार भी अछूता नहीं रह गया है.वैकल्पिक उर्जा के साधनों पर महंगाई की मार साफ नजर आ रही है.
