इमरजेंसी में 29 दिन के ऊपर के बच्चों को नहीं मिलेगी बाल रोग विशेषज्ञ की सुविधा

सीवान सदर अस्पताल के आपात कक्ष में 29 दिनों से अधिक उम्र के बच्चों का इलाज बाल रोग विशेषज्ञ के द्वारा नहीं किया जायेगा. सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ मो इसराइल ने आदेश जारी किया है कि प्रसव के 29 दिनों के बाद आपात कक्ष में उपचार कराने आनेवाले छोटे बच्चों का इलाज आपात कक्ष के ऑन ड्यूटी डॉक्टर द्वारा ही किया जायेगा.

सीवान सदर अस्पताल के आपात कक्ष में 29 दिनों से अधिक उम्र के बच्चों का इलाज बाल रोग विशेषज्ञ के द्वारा नहीं किया जायेगा. सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ मो इसराइल ने आदेश जारी किया है कि प्रसव के 29 दिनों के बाद आपात कक्ष में उपचार कराने आनेवाले छोटे बच्चों का इलाज आपात कक्ष के ऑन ड्यूटी डॉक्टर द्वारा ही किया जायेगा. प्रभारी अधीक्षक के आदेश से जहां एक तरफ आपात कक्ष में ड्यूटी करनेवाले परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ छोटे बच्चों को आपात स्थिति में दिखाने आनेवाले मरीजों के परिजनों को परेशानी हो रही है. मंगलवार को आपात कक्ष में कई छोटे बच्चों को गंभीर स्थिति में चाइल्ड ओपीडी में भेजा गया. बताया जाता है कि चाइल्ड ओपीडी में भी बच्चों को नहीं देखा गया. सदर अस्पताल में दो प्रशिक्षु, दो बच्चों के विशेषज्ञ सहित आठ डॉक्टर पदस्थापित हैं. सदर अस्पताल प्रशासन ने पुराने ओपीडी भवन की ऊपरी मंजिल के एक कमरे में छह बेड लगाकर पीकू वार्ड तो बना दिया है, लेकिन अभी तक यह पीकू वार्ड फंक्शन में नहीं आया है. प्रभारी अधीक्षक द्वारा बच्चों के डॉ उमेश एवं डॉ पंकज कुमार की ड्यूटी आपात के साथ-साथ पीकू वार्ड में भी लगाया गया है, लेकिन दोनों डॉक्टर नये ड्यूटी रोस्टर में भेदभाव का आरोप लगाकर ड्यूटी करने नहीं आ रहे हैं. इस संबंध में जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ एमआर रंजन ने बताया कि यह समय चमकी, एइएस व जेइ बीमारी के संक्रमण होने का मौसम है. सदर अस्पताल के आपात कक्ष एवं पीकू वार्ड में बच्चों को देखने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ की व्यवस्था होनी चाहिए. मैं इस संबंध में सिविल सर्जन से बात करूंगा.

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By Prabhat Khabar News Desk

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