जमीनी विवाद में फूफा के अंधाधुंध फायरिंग में भतीजा जख्मी, हालत गंभीर

सीवान:बिहार के सीवान में मुफ्फस्सिल थाने के बघड़ा गांव में शनिवार की सुबह करीब दस बजे फूफा ने डेढ़ कठ्ठा जमीन के लिए अपने भतीजे पर अंधाधुंध फायरिंग कर जख्मी कर दिया. घायल युवक स्वयं गाड़ी रोकर गाड़ी में बैठा तथा उपचार के लिए सदर अस्पताल पहुंचा. घायल युवक का नाम रजीउल्लाह उर्फ विक्की है […]

सीवान:बिहार के सीवान में मुफ्फस्सिल थाने के बघड़ा गांव में शनिवार की सुबह करीब दस बजे फूफा ने डेढ़ कठ्ठा जमीन के लिए अपने भतीजे पर अंधाधुंध फायरिंग कर जख्मी कर दिया. घायल युवक स्वयं गाड़ी रोकर गाड़ी में बैठा तथा उपचार के लिए सदर अस्पताल पहुंचा. घायल युवक का नाम रजीउल्लाह उर्फ विक्की है जो धनौती थाने के खगौरा निवासी अतीउल्लाह आजाद का पुत्र है.

घायल युवक के पिता ने बताया कि खगौरा निवासी उसका बड़ा जीजा शकील उर्फ राजु को उसकी छोटी बहन शहजादी खातुन ने अपना डेढ़ कठ्ठा हिस्सा बेच दिया है. इसको लेकर बहुत दिनों से विवाद चल रहा था. लेकिन, यह मामला कभी थाना या कोर्ट में नहीं गया. उसने बताया कि आज शनिवार की सुबह में शकील उर्फ राजु तथा उसका पुत्र खालिद उर्फ बिट्टु उस जमीन पर निर्माण कार्य करवा रहें थे. निर्माण कार्य का जब रजीउल्लाह उर्फ विक्की ने विरोध किया तो दोनों लोगों ने हथियार से फायरिंगकर दिया. विक्की को तीन गोली लगी है. एक बांह तथा एक गोली कंधे को को छेद कर निकल गयी है. तीसरी गोली जो पेट में लगी है वह स्पाइनल में फंसी है. मरीज की हालत चिंता जनक होने के कारण डॉक्टरों ने उसे पीएमसीएच रेफर कर दिया.

इधर, घटना की सुचना मिलते ही एएसपी कांतेश कुमार सदर अस्पताल पहुंचे तथा घटना की जानकारी लिया. अस्पताल में लोगों की भीड़ उमड़ जाने के कारण नगर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह भी सदर अस्पताल पहुंच कर विधि व्यवस्था में जुट गये. उन्होंने कहा कि घायल का बयान दर्ज किया जा रहा है.

बहन का हिस्सा देने के लिए स्वयं तैयार थे रजिउल्लाह
रजीउल्लाह उर्फ विक्की के पिता अतीउल्लाह आजाद ने बताया कि वह अपनी छोटी बहन शहजादी खातुन का हिस्सा देने के लिए तैयार थे. लेकिन उसकी बहन ने पैसे की लालच में अपने बहनोई खगौरा निवासी शकील उर्फ राजू को लिख दिया. उसने बताया कि उसकी दिव्यांग बहन नजरा परवीन की शादी शकील से 1993 में हुयी थी. लेकिन 1994 में उसका बहनोई उसकी बहन को छोड़ दूसरी शादी रचा लिया. उसने बताया कि बिना तालाक दिये वह शादी नहीं कर सकता था. हम कोर्ट की शरण में जाने वाले थे. अतिउल्लाह के पिता हाजी मोहम्मद रसुल्लाह एक शिक्षित एवं प्रतिष्ठित व्यक्ति होने के कारण अपने पुत्र को मुकदमा नहीं करने की सलाह दिया. उन्हें अपनी पुत्री का कोर्ट में खड़ा होना पसंद नहीं था. इसलिए उन्होंने अतीउल्लाह को अपनी बहन को अपने पास रखने को कहा.

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