11 नर्तकियां व दो ऑर्केस्ट्रा संचालक हिरासत में

नया सवेरा अभियान’ के तहत मंगलवार दोपहर पुलिस ने व्यापक छापेमारी अभियान चलाया. इस दौरान विभिन्न स्थानों से कुल 11 नर्तकियों तथा दो ऑर्केस्ट्रा संचालकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि अभियान के तहत कर्मा बाबा, डरैला बाजार, भुलौली, खिरौली, सेलौर बाजार एवं गुठनी नहर क्षेत्र में पुलिस टीमों ने एक साथ कार्रवाई किया. छापेमारी के दौरान संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर संबंधित लोगों को हिरासत में लिया गया.

गुठनी. ‘नया सवेरा अभियान’ के तहत मंगलवार दोपहर पुलिस ने व्यापक छापेमारी अभियान चलाया. इस दौरान विभिन्न स्थानों से कुल 11 नर्तकियों तथा दो ऑर्केस्ट्रा संचालकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. थानाध्यक्ष सुनील कुमार ने बताया कि अभियान के तहत कर्मा बाबा, डरैला बाजार, भुलौली, खिरौली, सेलौर बाजार एवं गुठनी नहर क्षेत्र में पुलिस टीमों ने एक साथ कार्रवाई किया. छापेमारी के दौरान संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर संबंधित लोगों को हिरासत में लिया गया. उन्होंने बताया कि ‘नया सवेरा अभियान’ का उद्देश्य मानव व्यापार, बाल श्रम, रेड लाइट गतिविधियों एवं अवैध ऑर्केस्ट्रा संचालन पर रोक लगाना है. साथ ही पीड़ितों के मुक्ति, पुनर्वास और पुनर्स्थापन की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है. पुलिस सभी हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जा रही है. सदर अस्पताल के इमरजेंसी से घंटों गायब रहे डॉक्टर प्रतिनिधि,सीवान. सदर अस्पताल के आपातकालीन कक्ष की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. मंगलवार को दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक आपात कक्ष में एक भी सरकारी डॉक्टर मौजूद नहीं थे. इस दौरान कई गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचे, लेकिन उन्हें देखने के लिए कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं था. हालात ऐसे हो गए कि इंटर्नशिप कर रहे आयुष चिकित्सकों को ही मरीजों का इलाज संभालना पड़ा.रोस्टर ड्यूटी के अनुसार दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक डॉक्टर अहमद अली और आयुष चिकित्सक डॉ. विपुल कुमार की ड्यूटी निर्धारित थी, लेकिन दोनों आपात कक्ष से नदारद रहे. बताया जा रहा है कि दोनों डॉक्टर ड्यूटी करने के बजाय अधीक्षक कार्यालय में बैठे थे. मामले की जानकारी जब अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार सिंह को दी गई, तब जाकर दोनों डॉक्टर आपात कक्ष में पहुंचे. हालांकि तब तक कई गंभीर मरीजों का प्राथमिक इलाज इंटर्न डॉक्टरों द्वारा किया जा चुका था.

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By DEEPAK MISHRA

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