सीतामढ़ी गबन हाईकोर्ट: सीतामढ़ी जिला परिषद में विभिन्न मदों और सैरातों से प्राप्त लगभग दो करोड़ रुपये के कथित वित्तीय घोटाले का गंभीर मामला अब पटना हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गया है. 25 अगस्त 2026 को दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंचायती राज विभाग के निदेशक को सख्त निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने आदेश दिया है कि सभी संबंधित पक्षों को विधिवत सुनवाई का पूरा अवसर प्रदान करते हुए कानून के अनुसार एक तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित किया जाए. इसके साथ ही न्यायालय ने पूरे मामले का निस्तारण छह सप्ताह की तय समय-सीमा के भीतर करने का आदेश दिया है.
डॉ. शुभम राज ने दायर की थी जनहित याचिका
यह कानूनी कार्रवाई जिला मुख्यालय डुमरा के निवासी डॉ. शुभम राज की ओर से दायर जनहित याचिका के आलोक में हुई है:
- याचिका का आधार: डॉ. शुभम राज ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जिला परिषद तथा पंचायती राज विभाग की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं, अवैध गतिविधियों और भारी वित्तीय गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच की गुहार लगाई थी.
- विभागीय अनदेखी: याचिकाकर्ता ने पूर्व में इस गंभीर वित्तीय अनियमितता की शिकायत पंचायती राज विभाग के निदेशक से लिखित रूप में की थी, लेकिन कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई न होने पर उन्होंने न्याय के लिए हाईकोर्ट की शरण ली.
चार वित्तीय वर्षों में ट्रेजरी में जमा नहीं हुई राशि
याचिका में लगाए गए आरोपों के मुताबिक, जिला परिषद के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के दौरान विभिन्न सैरातों की बंदोबस्ती तथा अन्य विभागीय मदों से भारी राजस्व की वसूली की गई थी. आरोप है कि नियमों की अनदेखी करते हुए लगभग दो करोड़ रुपये की यह सरकारी राशि सरकारी ट्रेजरी में जमा नहीं कराई गई. इस कथित गबन से सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचा है. हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अब इस मामले में त्वरित प्रशासनिक जांच और जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है.
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