UPSC Topper Interview: UPSC में 8वीं रैंक पाने वाले टॉपर राज कृष्ण झा बोले- डिस्ट्रैक्शन से दूर रहने से मिली सफलता

UPSC Topper Interview: टॉप टेन में आठवां स्थान लाकर सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर के अथरी गांव निवासी राज कृष्ण झा ने राज्य का मान बढ़ाया है. राज कृष्ण ने परीक्षा की तैयारी और अपने अनुभवों को विशेष तौर से प्रभात खबर, मुजफ्फरपुर के स्थानीय संपादक पवन प्रत्यय से साझा किया. पढ़ें बातचीत के प्रमुख अंश-

UPSC Topper Interview, मुजफ्फरपुर: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2024 का अंतिम परिणाम 22 अप्रैल को घोषित कर दिया. इस प्रतिष्ठित परीक्षा में प्रयागराज की शक्ति दुबे ने अखिल भारतीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है. दूसरे स्थान पर बड़ौदा की हर्षिता गोयल रहीं. इस वर्ष कुल 1009 उम्मीदवारों को विभिन्न सेवाओं जैसे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुना गया है. इस परीक्षा में बिहार के भी कई छात्रों ने परचम लहराया है.

सवाल : इस शानदार सफलता के बाद आप कैसा महसूस कर रहे हैं?

उत्तर : बेहद खुशी हो रही है. मुझे यह उम्मीद थी कि मैं इस बार इस परीक्षा को क्रैक कर लूंगा. लेकिन, बेहतर रैंक आने पर मेरी खुशी दोहरी हो गयी. आठवां रैंक पर आने पर मैंने दो-तीन बार रिजल्ट देखा, ताकि विश्वास पुख्ता हो जाये.

सवाल : अपनी पृष्ठभूमि और शिक्षा के बारे में कुछ बताएं, सिविल सेवा में आने के लिए कैसे प्रेरित हुए?

उत्तर : मेरे पिता सुनील कुमार झा प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं, माता जीवट देवी झा गृहिणी हैं. बड़ी बहन ज्योति झा सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं. बड़े भाई बिहार सरकार में असिस्टेंट इंजीनियर हैं और एक बहन दीपा झा पीएमसीएच में एमडी पीडियाट्रिक हैं. मेरी प्रारंभिक पढ़ाई बिहार बॉर्डर से सटे नेपाल के प्रीतामोड़ के एक स्कूल में हुई.

दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद 12वीं की परीक्षा 2014 में मुजफ्फरपुर के लंगट सिंह कॉलेज से उत्तीर्ण की. फिर इलाहाबाद के मोतीलाल राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से बीटेक किया. कोल्हापुर में एचपीसीएल में नौकरी की. लेकिन, मन यूपीएससी क्रैक करने का था. सिविल सेवा में आने के लिए मेरे जीजा अमित झा और बड़े भाई बाल कृष्ण झा ने काफी प्रेरित किया.

सवाल : आपकी यूपीएससी की तैयारी कब और कैसे शुरू हुई? आपने अपनी रणनीति किस प्रकार बनायी?

उत्तर : मैंने 2020 से इस परीक्षा की तैयारी शुरू की थी. 2020 कोविड का समय था. इसके कारण जॉब से थोड़ी फुर्सत मिलने के कारण तैयारी ठीक से हो पायी.

सवाल : क्या आपने कोचिंग ली थी या आपने स्वयं अध्ययन के लिए किन संसाधनों का उपयोग किया?

उत्तर : चूंकि मैं जॉब में था, जिसके कारण मुझे कोचिंग करने का समय नहीं मिल पाया. हालांकि, मैंने कोचिंग के मॉक टेस्ट जरूर दिये. इसके अलावा तैयारी में कुछ ऑनलाइन रिर्सोज व पीडीएफ नोट्स का इस्तेमाल किया.

सवाल : क्या आपने प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा व साक्षात्कार के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनायी थीं?

उत्तर : प्रारंभिक परीक्षा के लिए मैंने पर मजबूत पार्ट जैसे भूगोल के अलावा स्टैटिक पार्ट पर ज्यादा फोकस किया. मुख्य परीक्षा की बात करें, तो इसमें मॉक टेस्ट ज्यादा कारगर सिद्ध हुआ. साक्षात्कार में भी मॉक टेस्ट का योगदान अच्छा रहा.

सवाल : उत्तर लेखन मुख्य परीक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, आपने इसमें महारत हासिल करने के लिए क्या प्रयास किया?

उत्तर : जी, सात मिनट में 10 मार्क्स के प्रश्न का जवाब देना होता है. इसके लिए मैंने ज्यादा-से-ज्यादा अभ्यास पेपर देने की कोशिश की और आंसर राइटिंग पर भी जोर दिया.

सवाल : आपने अपनी पढ़ाई के दौरान समय प्रबंधन कैसे किया?

उत्तर : जी बिलकुल, मेरे जॉब का समय सुबह बजे छह बजे तक का था. घर आने के बाद सात-साढ़े सात बजे से मैं पढ़ाई शुरू करता था. इसके अलावा साप्ताहिक छुट्टी और सार्वजनिक छुट्टी के दिनों में अपनी तैयारी के लिए 10-12 घंटे का समय निकाल पाता था.

सवाल : इस कठिन तैयारी के दौरान आपने खुद कैसे मोटिवेट किया?

उत्तर : सबका मोटिवेट होने का अपना-अपना मंत्र होता है. शाम को मैं ऑफिस से आने के बाद टहलते हुए अपने आप को सेल्फ मोटिवेट करता था.

सवाल : आपने परीक्षा के दौरान तनाव व दबाव का सामना कैसे किया?

उत्तर : मैं जब भी परीक्षा की तैयारी के दौरान तनाव महसूस करता था, तो अपने घरवालों को फोन करता था. मेरा परिवार काफी बड़ा है. परिवार वालों से अपनी समस्या साझा करने से समाधान और तैयारी में मदद भी मिलती थी.

सवाल : आपने करेंट अफेयर्स की तैयारी कैसे की? क्या आपने इसके लिए किसी विशेष स्रोत का अनुसरण किया?

उत्तर : सुबह की शुरुआत अखबार पढ़ने से करता था. अखबार से मिली जानकारी से नोट्स बनाता था. इसके अलावा कुछ मासिक पत्रिकाएं जिनके आलेख काफी सरल शब्दों में होते थे उनका इस्तेमाल मैंने करेंट अफेयर्स की तैयारी के लिए किया.

सवाल : क्या आपकी तैयारी के दौरान कोई ऐसी गलती हुई जिससे आपको सीख मिली? आप भविष्य के उम्मीदवारों को उस गलती से बचने की क्या सलाह देंगे?

उत्तर : सबके अपने-अपने पथ होते हैं. मेरा पथ कोई और होगा, तो किसी का कोई और. सफल लोगों को पढ़ना और समझना चाहिए. लेकिन, मेरा मानना है कि अपनी क्षमता के हिसाब से तैयारी करनी चाहिए. मेरी राय है कि अपने स्टडी मैटेरियल को कॉन्साइज करना चाहिए. इसके अलावा रिवीजन भी तैयारी का महत्वपूर्ण पार्ट है.

सवाल : सिविल सेवा में शामिल होने के बाद आपकी क्या प्राथमिकताएं होंगी? आप किस क्षेत्र में विशेष रूप से योगदान देना चाहेंगे?

उत्तर : सरकार मुझे जिस में क्षेत्र में काम देगी, उस क्षेत्र में बेहतर करने की कोशिश की करूंगा. समाज सेवा मेरी प्राथमिकता है. काम के प्रति मेरी निष्ठा सौ फीसदी रहेगी.

सवाल : आप देश के युवाओं और विशेष रूप से उन लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगे जो सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं?

उत्तर : मेरी राय में सभी का बेहतर समय आता है. केवल शिद्दत से किसी काम में लगना होता है. जो भी छात्र इस परीक्षा में असफल हुए होंगे उनको घबराने की जरूरत नहीं है. उनका भी अच्छा समय आयेगा.

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सवाल आपकी हॉबी क्या है? हाल के दिनों में कौन-सी फिल्म आपने देखी है.

उत्तर : किक्रेट खेलना मुझे पसंद है. इसके अलावा विज्ञान से संबंधित फिल्म देखना भी मुझे पसंद है. साइंस में मुझे काफी अभिरुचि है. इसकी अद्यतन जानकारी के लिए मैं संबंधित किताबें पढ़ता हूं. लास्ट टाइम मैं पंकज त्रिपाठी अभिनीत न्यूटन फिल्म देखी थी. इस फिल्म ने मुझे काफी प्रभावित किया है.

सवाल : क्या आपने तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनायी थी?

उत्तर : तैयारी के दौरान मैं सोशल मीडिया से अपने को दूर रख था. हालांकि, कई लोगों ने सोशल मीडिया का सही तरीके से इस्तेमाल करके सफलता अर्जित की है. सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलू से लाभ मिल सकता है.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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