Sitamarhi Toilet Scam: जिले के सुप्पी प्रखंड की मोहनी मंडल पंचायत में हुए बहुचर्चित शौचालय घोटाले में जिलाधिकारी (डीएम) ने एक बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है. डीएम ने मामले में मुख्य रूप से संलिप्त पाए गए स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के कार्यपालक सहायक अजय कुमार को तत्काल प्रभाव से चयन मुक्त करते हुए नौकरी से निकाल दिया है. इस भ्रष्टाचार के खेल में सुप्पी प्रखंड के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और प्रखंड समन्वयक भी पूरी तरह फंसे हुए हैं. सूत्रों के अनुसार दोषी तत्कालीन बीडीओ के खिलाफ विभागीय स्तर पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को आधिकारिक पत्र भी भेजा जा चुका है.
36 फर्जी लाभुकों के नाम पर की राशि की बंदरबांट
शौचालय घोटाले के पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (एलएसबीए) के तहत कागजों पर ही शौचालय का निर्माण दिखाकर सरकारी राशि का गबन करने की गंभीर शिकायत प्रशासन को मिली थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने डीआरडीए निदेशक को इसकी सघन जांच सौंपी थी. निदेशक द्वारा की गई जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि कुल 36 फर्जी लाभुकों से जुड़ा कोई भी वैध कागजात संबंधित कार्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध ही नहीं है. जांच के दौरान तत्कालीन बीडीओ ने स्वयं स्वीकार किया था कि जमीनी सत्यापन में धरातल पर शौचालय का कोई भी वास्तविक लाभार्थी नहीं मिला था.
प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश, पूरी सरकारी राशि की होगी वसूली
निदेशक की अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर पिछले महीने ही डीएम ने तत्कालीन बीडीओ, प्रखंड समन्वयक और कार्यपालक सहायक के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने का सख्त आदेश दिया था. वर्तमान में कार्यपालक सहायक अजय कुमार के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज है. इसके साथ ही डीएम ने इन तीनों आरोपियों के खिलाफ गबन की गई पूरी सरकारी राशि की रिकवरी (वसूली) के लिए नीलाम वाद दायर करने का भी कड़ा निर्देश जारी किया है.
स्पष्टीकरण का जवाब असंतोषजनक मिलने पर होगी अंतिम कार्रवाई
इससे पहले दोषी कर्मी अजय कुमार ने डीएम को अपना एक अभ्यावेदन देकर इस मामले की नए सिरे से वस्तुस्थिति जांच कराने की मांग की थी. जिला प्रशासन द्वारा पूर्व के जांच प्रतिवेदन एवं कर्मी के अभ्यावेदन की विस्तृत समीक्षा की गई. समीक्षा के उपरांत आरोपी कुमार से द्वितीय कारण पृच्छा (स्पष्टीकरण) की मांग की गई. प्रशासन को सौंपे गए उनके स्पष्टीकरण का जवाब पूरी तरह से असंतोषजनक और साक्ष्यों से परे पाया गया, जिसके बाद डीएम ने उन्हें सेवा से चयन मुक्त करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया. इसके अलावा तत्कालीन बीडीओ के खिलाफ ग्रामीण विकास विभाग को प्रपत्र 'क' में कड़े आरोप गठित कर भेज दिए गए हैं.
