Sitamarhi News: प्रखंड के एकडंडी मसहा गांव स्थित श्री राम जानकी मंदिर में रविवार को शुरू हुआ दो दिवसीय श्री सीताराम नाम संकीर्तन महायज्ञ सोमवार को संत समागम के साथ संपन्न हो गया. महंत विष्णु दास के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में संत-महंतों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही.
संतों के प्रवचन से मिला आध्यात्मिक संदेश
समागम के दौरान सीतामढ़ी से पधारे डंडी बाबा राघवेंद्र दास जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि संत ही भगवान का स्वरूप होते हैं और भगवान संतों के रूप में धरती पर आकर धर्म की स्थापना करते हैं. उन्होंने कहा कि राम नाम की ज्योति से समाज को नई दिशा मिलती है और सोए हुए मानव को जागृत करने का कार्य संत करते हैं. भगवान की आराधना के बिना अधूरा है, वहीं भगवान भी सच्चे भाव के बिना अधूरे हैं. भगवान जात-पात से परे होते हैं और वे केवल निष्कलंक भक्ति एवं स्थिर भाव के भूखे होते हैं.
मिथिलांचल की महिमा का किया वर्णन
संत राघवेंद्र दास ने अपने प्रवचन में मिथिलांचल की महिमा का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इस पावन धरती के कण-कण में सियाराम का वास है. जहां माता सीता का निवास है, वहीं भगवान राम का भी वास होता है. उन्होंने कहा कि भगवान ने मिथिला की धरती पर अवतार लेकर लोगों को सेवा और भक्ति का संदेश दिया.
भंडारे में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
कार्यक्रम के समापन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें संत-महंतों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर भक्ति और श्रद्धा के माहौल से सराबोर रहा।इस मौके पर महंत राघव विजय दास, महंत बालक दास, राम प्रीत दास, महंत राघव दास, महंत राम दिनेश दास, महंत हरिदास, महंत धीरेंद्र दास, महंत मोहन दास, कमल सिंह, जुलम सिंह, राज किशोर राय, विनय राय, ललन साह, जितेंद्र चौधरी, संत भूषण दास समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
सीतामढ़ी से मोहम्मद दुलारे की रिपोर्ट
