सीतामढ़ी: योजनाओं की सुस्ती से थमा शहर का विकास, नगर निगम की लापरवाही से नागरिक बेहाल

Sitamarhi News: सीतामढ़ी नगर निगम की सीवरेज, जलनिकासी, सड़क निर्माण, कचरा प्रबंधन, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं वर्षों से अधूरी हैं. करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में देरी से शहरवासी लगातार परेशान हैं.

सीतामढ़ी से रतिकांत झा की रिपोर्ट

Sitamarhi News: सीतामढ़ी नगर निगम क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं से जुड़ी कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं. सीवरेज, जलनिकासी, सड़क निर्माण, ठोस कचरा प्रबंधन, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और राजस्व संग्रह जैसी बुनियादी योजनाओं में सुस्ती के कारण शहरवासियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. करोड़ों रुपये की स्वीकृति के बावजूद अधिकांश परियोजनाएं अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं.

नमामि गंगे की एसटीपी योजना अब भी अधूरी

शहर के गंदे पानी के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए नमामि गंगे योजना के तहत प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और इंटरसेप्शन एंड डायवर्सन (I&D) परियोजना अब तक शुरू नहीं हो सकी है. प्रक्रिया जारी रहने के बावजूद शहरवासियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है.

101 करोड़ की ड्रेनेज योजना बनी परेशानी

बुडको की करीब 101 से 104 करोड़ रुपये की वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना चार वर्षों बाद भी अधूरी है. लंबे समय तक निर्माण कार्य बंद रहने और पुराने नालों को तोड़ दिए जाने से जलजमाव की समस्या और गंभीर हो गई है. हाल ही में तीसरी बार मोक्षधाम से आउटफॉल तक नाले के निर्माण कार्य की शुरुआत हुई है. अब बायपास बस स्टैंड, यादव चौक, किरण चौक, मेहसौल चौक, गौशाला चौक, सिमरा और विश्वनाथपुर जैसे इलाकों को भी योजना में शामिल किया गया है.

सड़क और नाला निर्माण की धीमी रफ्तार

वर्ष 2023-24 में स्वीकृत कई पीसीसी सड़क और पक्के नाले निर्माण योजनाएं आज भी अधूरी हैं. वार्ड-46 सहित कई इलाकों में निर्माण कार्य लंबित रहने से लोगों को आवागमन और जलनिकासी की समस्या झेलनी पड़ रही है.

कचरा प्रबंधन व्यवस्था पटरी से उतरी

शहर से प्रतिदिन लगभग 66 टन कचरा निकलता है, जिसमें करीब 40 प्रतिशत प्लास्टिक शामिल है. वैज्ञानिक प्रोसेसिंग प्लांट के अभाव में अधिकांश कचरा डंपिंग स्थलों और खाली जमीनों पर फेंका जा रहा है. डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था भी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो सकी है. खैरवा में प्रस्तावित 12 करोड़ रुपये का एमआरएफ सेंटर अभी शुरुआती चरण में है. नगर निगम ने पांच कंपोस्ट प्लांट, 36 टीपर, चार स्ट्रीट लोडर और एक जेटिंग मशीन खरीदने का निर्णय लिया है, लेकिन इसका लाभ अभी तक आम लोगों तक नहीं पहुंचा है.

पेयजल और स्ट्रीट लाइट योजनाएं भी अधूरी

हर घर जल योजना और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी 46 वार्डों में 2500 एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने तथा प्रत्येक वार्ड में दो-दो सबमर्सिबल लगाने की योजना पर भी अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है.

अतिक्रमण और प्लास्टिक पर कार्रवाई कमजोर

नगर निगम की ओर से सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ नियमित अभियान चलाने का प्रावधान है, लेकिन यह प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है. वहीं शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी केवल औपचारिक बनकर रह गई है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

प्रवेश द्वार और राजस्व सर्वे भी लंबित

शहर के नौ प्रमुख स्थलों पर महापुरुषों के नाम से प्रवेश द्वार बनाने की योजना करीब दो वर्षों से लंबित है. वहीं होल्डिंग और ट्रेड सर्वे नहीं होने से नगर निगम को करोड़ों रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो रहा है. सर्वे के अभाव में शहर के मकानों, होटलों, मॉल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सही आंकड़ा भी उपलब्ध नहीं है.

नागरिकों को विकास कार्य पूरे होने का इंतजार

शहरवासियों का कहना है कि विकास योजनाओं की घोषणा तो लगातार होती है, लेकिन उनका लाभ समय पर नहीं मिल पाता. लोगों ने नगर निगम से लंबित परियोजनाओं को शीघ्र पूरा कर नागरिक सुविधाओं में सुधार की मांग की है.

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By Purushottam Kumar

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