Sitamarhi News: बिहार के सीतामढ़ी जिले के बथनाहा प्रखंड में मनरेगा योजना के तहत हुए पशु शेड निर्माण में भारी अनियमितता सामने आई है. जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. जिलाधिकारी (डीएम) रिची पांडेय के निर्देश पर हुई जांच के बाद संबंधित अधिकारियों, कर्मियों और जनप्रतिनिधियों से कुल 37 लाख 16 हजार 346 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया गया है.
बांस-लकड़ी पर टिका दिया शेड
विभिन्न शिकायतों के बाद डीआरडीए निदेशक, मनरेगा डीपीओ और कार्यपालक अभियंता की संयुक्त टीम ने 144 योजनाओं की रैंडम जांच की. जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की जमकर अनदेखी की गई. निर्धारित जीआई पाइप की जगह कई जगहों पर बांस और लकड़ी का उपयोग कर खानापूर्ति की गई थी. इसके अलावा 134 योजनाओं में अनिवार्य सूचना पट्ट (साइन बोर्ड) तक नहीं पाए गए.
पशु शेड में रहने लगे लोग
जांच दल ने पाया कि 30 पशु शेड का उपयोग उस उद्देश्य के लिए नहीं हो रहा था जिसके लिए सरकारी राशि दी गई थी. कई लाभुक इन शेडों का उपयोग आवासीय घर या व्यावसायिक दुकानों के रूप में कर रहे थे. प्रशासन ने इसे सरकारी राशि का दुरुपयोग माना है और ऐसे लाभुकों से भी राशि वसूलने का निर्णय लिया है.
मुखिया से लेकर अधिकारियों तक पर गिरेगी गाज
डीएम ने इस घोटाले के लिए तत्कालीन पीओ (प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी), जेई, लेखापाल, पंचायत तकनीकी सहायक, पीआरएस और बखरी पंचायत के मुखिया को जिम्मेदार माना है. इन सभी से समानुपातिक राशि वसूल की जाएगी. उप विकास आयुक्त (डीडीसी) संदीप कुमार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और सख्त किया जा रहा है.
सीतामढ़ी से रतिकांत झा की रिपाेर्ट
